उत्तराखंड में मानसून सक्रिय, 82 सड़कें बंद, मंदाकिनी चेतावनी स्तर पर

 


देहरादून, 01 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा तथा कई पर्वतीय जिलों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज से अति तीव्र वर्षा की चेतावनी जारी की है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश में 82 सड़कें बंद हैं, जबकि रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी नदी चेतावनी स्तर पर पहुंच गई है।

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, नैनीताल और चम्पावत जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने तथा तेज से अति तीव्र वर्षा के दौर की भी संभावना है। वहीं हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी गरज-चमक के साथ बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है। विभाग ने चेताया है कि भारी वर्षा के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़कों के अवरुद्ध होने, निचले इलाकों में जलभराव तथा छोटे नदी-नालों के उफान पर आने की स्थिति बन सकती है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की सुबह की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 82 सड़कें अवरुद्ध हैं। इनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग, एक राज्य राजमार्ग, दो बीआरओ मार्ग, दो एमडीआर, एक ओडीआर और 73 अन्य सड़कें शामिल हैं। सबसे अधिक 24 सड़कें चमोली, 14 पिथौरागढ़, नौ-नौ रुद्रप्रयाग और टिहरी बागेश्वर में सात सड़कें में बंद हैं। संबंधित विभागों की मशीनें मार्गों को खोलने के कार्य में जुटी हुई हैं। आईएमडी के ताजा फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन में उत्तराखंड के लिए फिलहाल फ्लैश फ्लड का खतरा 'निल' बताया गया है। इसके बावजूद प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी चेतावनी स्तर पर

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) के अनुसार, शनिवार सुबह जनपद में मौसम बादलों और कोहरे से घिरा रहा। सुबह सात बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक मंदाकिनी नदी का जलस्तर 625.00 मीटर दर्ज किया गया, जो इसके चेतावनी स्तर के बराबर है। वहीं अलकनंदा नदी का जलस्तर 625.80 मीटर रहा, जबकि इसका चेतावनी स्तर 626.00 मीटर है।

स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने नगर निकायों के माध्यम से लाउडस्पीकर से लोगों से नदी किनारों से दूर रहने और अनावश्यक रूप से नदी के समीप नहीं जाने की अपील की है। गंगानगर और गौरीकुंड में भी नदी का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बना हुआ है।

जनपद में एक राष्ट्रीय राजमार्ग, एक राज्य मार्ग, दो लोक निर्माण विभाग, पांच प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) तथा एक एनपीसीसी मार्ग सहित कुल 10 सड़कें बंद हैं। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखते हुए किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उधर, भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिला आपदा प्रबंधन विभाग का कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

प्रशासन ने बताया कि भूस्खलन, सड़क अवरुद्ध होने, जलभराव, मकान क्षति अथवा अन्य किसी भी आपदा संबंधी सूचना मिलते ही संबंधित विभागों और राहत-बचाव दलों को तत्काल मौके पर भेजा जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर 9068187120 और 7055753124 पर तुरंत सूचना दें।

प्रशासन ने लोगों से वर्षा के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों एवं संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रखते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय