मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर सख्ती, माइक्रो ट्रैकिंग और फील्ड मॉनिटरिंग पर जोर
देहरादून, 09 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड में सुरक्षित मातृत्व और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव सचिन कुर्वे ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में देहरादून और चम्पावत जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक की विशेषता यह रही कि फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एएनएम ने सीधे संवाद कर जमीनी चुनौतियों और प्रगति की जानकारी साझा की। सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में किसी भी स्तर पर होम डिलीवरी स्वीकार्य नहीं होगी और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अपेक्षित प्रसव तिथि आधारित माइक्रो ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि हर गर्भवती महिला की समयबद्ध निगरानी हो सके। आशा और एएनएम के बीच दैनिक समन्वय के माध्यम से अंतिम स्तर तक फॉलो-अप सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को चिन्हित होम डिलीवरी क्षेत्रों में स्वयं फील्ड विजिट करने को कहा गया।
दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में प्रसव सेवाओं की चुनौतियों को देखते हुए सचिव ने निर्देश दिए कि जहां सड़क या परिवहन की सुविधा सीमित है, वहां हेली सेवा का प्रभावी उपयोग किया जाए ताकि गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
बैठक में गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय पर पहचान, एनीमिया नियंत्रण, टीबी उन्मूलन अभियान और पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सचिव ने कहा कि सभी जिलों को परिणाम आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे तुरंत लागू करना होगा और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना है और इसके लिए फील्ड स्तर पर मजबूत मॉनिटरिंग, त्वरित चिकित्सा सुविधा और संस्थागत प्रसव को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. रश्मि पंत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय