उत्तराखंड के 98 शहरों का होगा सुनियोजित विकास, जल्द तैयार होंगे मास्टर प्लान

 


देहरादून, 22 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड में सुनियोजित और दीर्घकालीन शहरी विकास के लिए 98 महायोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें अमृत-1 के तहत सात, अमृत-2 के तहत 23 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत सात क्लस्टरों में 65 नगर निकायों की महायोजनाएं शामिल हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के सुनियोजित और दीर्घकालीन शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से ट्रैफिक जाम, अवैध निर्माण और अव्यवस्थित शहरीकरण से निपटने में मदद मिलेगी और आम जनता को बेहतर सड़कें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री घोषणा के तहत भी तीन महायोजनाएं तैयार की जा रही हैं।

सभी महायोजनाओं को वर्ष 2041 और 2045 के दीर्घकालीन विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी को अमृत-1 में शामिल किया गया है।

अमृत-2 के तहत कोटद्वार, श्रीनगर, पौड़ी, जसपुर, नगला, खटीमा, किच्छा, बाजपुर, सितारगंज, गदरपुर, रामनगर, मंगलौर, लक्सर, टनकपुर, गोपेश्वर, ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी और टिहरी के मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

महायोजनाओं की प्रमुख विशेषता जीआईएस आधारित प्लानिंग है।

सरकार के अनुसार उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां द्वितीय और तृतीय श्रेणी के निकायों के लिए भी जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। इससे भूमि उपयोग के बेहतर नियोजन, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, ड्रेनेज और आपदा प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।

विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास, पर्यटन को बढ़ावा, स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसरों का सृजन, भौतिक एवं सामाजिक अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को योजनाओं में प्राथमिकता दी जा रही है।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप महायोजनाओं में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियोजित विकास पर फोकस किया गया है। इनके माध्यम से संबंधित विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी।

महायोजनाएं तैयार करने में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) नई दिल्ली, एसपीए भोपाल, एनआईटी कालीकट, एनआईटी सूरत और एमएनआईटी जयपुर समेत विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय