मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय समिति गठित
हरिद्वार, 07 जुलाई (हि.स.)। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए सात सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया है। नई व्यवस्था के तहत मंदिर के पुजारियों को बिना जेब वाला कुर्ता पहनकर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति होगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने मंगलवार को हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि चढ़ावे से जुड़े विवादों के कारण समर्पित लोगों की छवि भी प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर प्रकरण में चोरी कर्मचारियों और ड्राइवर ने की,लेकिन बदनामी चंपत राय के हिस्से आई। उन्होंने चंपत राय को 'सादे कपड़ों में उच्च कोटि के संत' बताते हुए कहा कि उनका नाम विवादों में आने से उन्हें व्यक्तिगत रूप से कष्ट हुआ।
उन्होंने कहा कि इसी अनुभव से सबक लेते हुए मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत सात सदस्यीय निगरानी समिति गठित की गई है,जिसमें मंदिर के पुजारी भी शामिल हैं।
रविंद्र पुरी ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले नारियल,फूल, चुनरी अथवा अन्य प्रसाद सामग्री का किसी भी स्थिति में पुनर्चक्रण (रीसायकल) नहीं किया जाएगा। साथ ही,मंदिर में ड्यूटी के दौरान सभी पुजारियों को बिना जेब वाला कुर्ता पहनना अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि निगरानी समिति में शेषमणि दुबे, पवन गिरी, द्वारिका प्रसाद मिश्रा,विनय दुबे, राम भवन यादव,जनार्दन गुप्ता और चंदन बनर्जी को शामिल किया गया है।
रविंद्र पुरी ने कहा कि यदि कोई पुजारी मंदिर में चोरी करते हुए या मंदिर की सामग्री, प्रसाद अथवा नारियल को बाजार में बेचते हुए पकड़ा जाता है,तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे तत्काल मंदिर की सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला