विदेश की नौकरी छोड़ गांव लौटे दीपक, 30 नाली में खड़ा किया कीवी का फार्म
पौड़ी गढ़वाल, 11 अक्टूबर (हि.स.)। पहाड़ों में स्वरोजगार की संभावनाओं को तलाशते हुए कई युवा खेती और बागवानी को आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने भी ऐसा ही प्रयास किया है। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद दीपक ने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया।
इसमें उन्होंने मुख्य रूप से कीवी के उत्पादन सहित सेब, पुलम, एप्रिकॉट, नींबू, माल्टा सहित विभिन्न फलों का उत्पादन भी किया जा रहा है। दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई। वर्तमान में फार्म में कीवी के लगभग 250 पौधे हैं, जबकि सेब के 400 और नींबू-माल्टा के करीब 150 पौधे लगाए गए हैं।
इसके अलावा अन्य फल भी उगाए जा रहे हैं। दीपक ने बताया कि फार्म में एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है। कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है। बागवानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया, जबकि कृषि विभाग की ओर से फार्म में घेरबाड़ की गई है।
दीपक नौटियाल का प्रयास केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है। फार्म में उत्पादित कीवी और अन्य फलों की सफाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों में स्थानीय महिला समूहों को भी शामिल किया गया है। फार्म से उत्पाद निकालने के बाद उन्हें महिला समूहों तक पहुंचाया जाता है, जहां महिलाएं विभिन्न उत्पाद तैयार करने में योगदान देती हैं। इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और फिर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया से पौड़ी के करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। महिला समूह बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट सहित विभिन्न उत्पाद भी तैयार करते हैं। इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
फार्म के उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने 'रंगीलो छबीलो ग्रुप' के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। उत्पादों की मांग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से आती है। इसके अलावा कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग के कार्यों में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है।
स्थानीय स्तर पर उत्पादन, महिला समूहों के माध्यम से उत्पाद तैयार करने और दिल्ली में पैकेजिंग के बाद बाजार तक पहुंचाने की इस प्रक्रिया ने कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए हैं। दीपक नौटियाल बताते हैं कि फार्म में सामान्य दिनों में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को काम मिलता है। उनका कहना है कि खेती और बागवानी को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
फार्म में बिना दवाइयों के उत्पादन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन से शुरू हुआ यह प्रयास अब महिला समूहों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह