पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार संकल्पबद्ध : मुख्यमंत्री
- ट्राउट फार्मिंग बन रही स्वरोजगार का बड़ा माध्यम
- मुख्यमंत्री ने रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को दिखायी हरी झंडी, स्वरोजगार योजनाओं पर दिया जोर
देहरादून, 07 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को निरंजनपुर में राज्यभर से आए पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों के साथ संवाद करते हुए कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका का प्रमुख आधार है। पशुपालकों,दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार संकल्पबद्ध है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को भी फ्लैग ऑफ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष जैसी योजनाएं संचालित कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में 'मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन' के तहत पशुधन इकाइयों की स्थापना की जा रही है, जिसमें पात्र लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक ऋण अनुदान दिया जा रहा है। गोट वैली और पोल्ट्री वैली योजनाओं के माध्यम से भी पशुपालकों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में गौ पालन, बकरी पालन और भेड़ पालन के जरिए राज्य में साढ़े 11 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य के 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स संचालित की जा रही हैं तथा प्रत्येक जनपद में मॉडल पशु चिकित्सालय विकसित किए जा रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों के पशुपालकों को वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत आईटीबीपी के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्राउट फार्मिंग राज्य में रोजगार और आय का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। ट्राउट फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में 170 करोड़ रुपये की ट्राउट प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ट्राउट हैचरी स्थापित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड को हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। राज्य का मत्स्य क्षेत्र 9 प्रतिशत से अधिक की दर से वृद्धि कर रहा है और पिछले वर्ष भारत सरकार ने उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों की श्रेणी में श्रेष्ठ मत्स्य राज्य का सम्मान भी प्रदान किया।
वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त राज्य बनाने के लिए चयनित किया है। इससे पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य के दुग्ध उत्पादन में प्रतिवर्ष लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को लगभग 380 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पारंपरिक बद्री गाय के ‘बद्री घी’ को देश का पहला जीआई टैग प्राप्त हुआ है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विशिष्टता को वैश्विक पहचान मिली है।
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में पिछले चार वर्षों में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना लागू की गई है और गोट वैली परियोजना से 5,827 लाभार्थी जुड़े हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी प्रदान की जा रही है और वर्तमान में सभी दुग्ध संघ लाभ में संचालित हो रहे हैं।
संवाद कार्यक्रम में हरिद्वार के पशुपालक हरिकिशन लखेड़ा ने बताया कि ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म योजना के तहत 50 गायें खरीदने के बाद वे प्रतिदिन 300 लीटर दूध उत्पादन कर रहे हैं और आठ लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 1.15 लाख रुपये की शुद्ध आय हो रही है।
वहीं डोईवाला के अमित सिंह ने बताया कि उन्होंने पशु चारे के लिए एफपीओ की स्थापना की, जिसमें 386 लोग जुड़े हैं और तीन वर्षों में 10 करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर हुआ है।
इस अवसर पर राजेन्द्र प्रसाद अंथवाल, सुरेन्द्र मोघा, उत्तम दत्ता, सीमा चौहान, संतोष बडोनी सहित अनेक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय