उत्तराखंड में लखपति दीदियों की संख्या तीन लाख के पार, 2026-27 में 1.12 लाख का लक्ष्य

 


देहरादून, 13 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार ने बड़ी उपलब्धि का दावा किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में लखपति दीदियों की संख्या 3 लाख 3 हजार 696 पहुंच गई है। प्रदेश सरकार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक लाख 12 हजार और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मातृशक्ति उत्तराखंड की आर्थिक और सामाजिक क्रांति की सबसे बड़ी संवाहक है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ राज्य के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के नए स्रोत विकसित करने और उनके सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार नवंबर 2022 में लखपति दीदी योजना शुरू होने के बाद हर साल निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले हासिल किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्रदेश में 3,03,696 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के माध्यम से अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंचाई है।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अनुदान और ऋण आधारित योजनाओं का लाभ लेकर अलग-अलग व्यवसायों से अपनी आर्थिकी मजबूत कर रही हैं। इनमें जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेयरी एवं पशुपालन, मौन पालन, मशरूम उत्पादन और होमस्टे संचालन प्रमुख हैं। मिलेट आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं मिलेट से तैयार बेकरी उत्पादों का भी निर्माण कर रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर आय के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।

सरकार के अनुसार स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री के लिए प्रदेश में 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरस मेलों का आयोजन भी किया जा रहा है।

सरकार की पहल पर ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता में सुधार से इन उत्पादों की महानगरों और प्रमुख शहरों में मांग बढ़ी है।

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों और 95 विकासखंडों में 5,19,943 महिलाओं को संगठित किया गया है। इनके लिए 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) गठित किए गए हैं।

सरकार ने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतिगत फैसलों को लागू करने की बात कही है। इनमें सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रमुख हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना, ड्रोन दीदी योजना, सोलर सखी योजना, मुख्यमंत्री सतत आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय