नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय: कुसुम कंडवाल

 


देहरादून, 11 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ को भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

देहरादून स्थित सचिवालय मीडिया सेंटर में शनिवार को कुसुम कंडवाल ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें शासन के केंद्र में स्थान मिलेगा।

कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब ‘महिलाओं के विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।

उन्होंने महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न आंकड़े साझा करते हुए बताया कि मुद्रा योजना के तहत 69 प्रतिशत ऋण महिलाओं को दिया गया है, जबकि जनधन योजना के तहत करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बालिकाओं की शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

इसके साथ ही उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कंडवाल ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि नारी शक्ति की भूमि भी है। राज्य महिला आयोग इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी और अधिक सशक्त हो सके।

उन्होंने समाज से इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह अधिनियम विकसित भारत 2047 के संकल्प की मजबूत आधारशिला साबित होगा।------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय