कुंभ में ‘वेलकम’ नहीं, गूंजेगा ‘स्वागतम’, कुली से ड्राइवर तक सीखेंगे संस्कृत

 

हरिद्वार, 31 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल की तैयारी शुरू कर दी है। कुंभ मेला- 27 के दौरान धर्मनगरी हरिद्वार और तीर्थनगरी ऋषिकेश में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत संस्कृत भाषा के शब्दों और श्लोकों से किया जाएगा। यानी कुंभ के दौरान यात्रियों को ‘वेलकम’ के बजाय ‘स्वागतम’ सुनाई देगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत हरिद्वार और ऋषिकेश को संस्कृत नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य कुंभ जैसे वैश्विक धार्मिक आयोजन के माध्यम से संस्कृत भाषा को व्यापक पहचान दिलाना है।

उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार के अनुसार, संस्थान जल्द ही 100 से अधिक लोगों को संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देने जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में रेलवे स्टेशन के कुली, ऑटो चालक, टैक्सी चालक, बस कंडक्टर सहित आम लोगों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें यात्रियों से बातचीत में इस्तेमाल होने वाले सामान्य शब्दों और वाक्यों का संस्कृत में प्रयोग करना सिखाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि कुंभ के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के साथ स्थानीय स्तर पर संस्कृत के सामान्य शब्दों में संवाद किया जा सके। योजना के तहत अलग-अलग वर्गों से जुड़े लोगों को हर माह प्रशिक्षण देने की तैयारी है।

अपर कुंभ मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि आगामी कुंभ मेले के प्रचार-प्रसार के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। इसमें संस्कृत भाषा के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया जाएगा। कुंभ से जुड़े प्रतीक चिन्हों और प्रचार सामग्री में संस्कृत भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले से संबंधित कार्यों और गतिविधियों का प्रचार भी संस्कृत के माध्यम से करने की योजना है। इसके लिए उत्तराखंड संस्कृत संस्थान को बजट की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

कुंभ में संस्कृत के अधिकाधिक प्रयोग से उत्तराखंड की प्राचीन संस्कृति और भाषा का संदेश देश-विदेश तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ के रूप में मिली पहचान के साथ संस्कृत भाषा का जुड़ाव कुंभ के दौरान प्रदेश की सांस्कृतिक छवि को और मजबूत करेगा

हरिद्वार के कुली संगठन ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। कुली संगठन के अध्यक्ष किशन सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान में वे संस्कृत सीखेंगे और हरिद्वार पहुंचने वाले यात्रियों का ‘स्वागतम्’ कहकर स्वागत करने का प्रयास करेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला