कुंभ मेला प्रबंधन का पुलिस कर्मियाें काे दिया गया प्रशिक्षण

 


हरिद्वार, 25 अगस्त (हि.स.)। सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र हरिद्वार में कुंभ मेला-2027 के छह दिवसीय पंचम चरण प्रशिक्षण के तहत पुलिस कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया गया। इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रो. डॉ. नरेश चौधरी ने पुलिस कर्मियों को कुंभ के इतिहास, भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और अखाड़ों की परंपराओं की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 1986 के कुंभ में पुलों की कमी और वीआईपी व्यवस्था घटना का कारण बनी थी, जांच आयोग के सुझाव पर अतिरिक्त पुल बने और वीआईपी घाट अलग किया गया। 1996 की सोमवती अमावस्या पर भगदड़ में 22 लोगों की मौत हुई थी, इसके बाद जस्टिस अग्रवाल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं।

2004 के अर्द्धकुंभ में व्यापारियों-पुलिस विवाद के बाद जस्टिस इरशाद हुसैन आयोग के सुझावों से मेला प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं में बेहतर समन्वय बना।

1998 में अखाड़ों के विवाद का समाधान संवाद से हुआ और सामंजस्य बेहतर रहा।

2010 के कुंभ के अनुभव के बाद बिरला घाट पर अतिरिक्त पुल बना, जिससे जूना अखाड़े की शाही स्नान यात्रा और श्रद्धालुओं के लिए वन-वे व्यवस्था सुचारु हुई। 2021 के कुंभ में कोविड-19 चुनौती का सामना संत समाज, अखाड़ों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन ने मिलकर किया।

प्रो. चौधरी ने कांवड़ मेला और स्नान पर्वों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुंभ की सफलता के लिए पुलिस, प्रशासन, अखाड़ों और नागरिकों के बीच समन्वय, सतर्कता और प्रभावी भीड़ प्रबंधन जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला