कारगिल विजय भारतीय सेना के शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का अमर अध्याय : धामी

 




देहरादून, 25 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अद्वितीय शौर्य, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का अमर अध्याय है, जो देश के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने सर्वोच्च बलिदान देकर देवभूमि को वीरभूमि के रूप में गौरवान्वित किया।

मुख्यमंत्री आवास में विजय कारगिल दिवस के पूर्व संध्या पर शनिवार को आयोजित सैनिक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, शहीदों के परिजनों और सैन्य विभूतियों को सम्मानित किया और कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि अत्यंत विषम भौगोलिक परिस्थितियों, भीषण ठंड और दुर्गम पहाड़ियों के बीच भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देकर विजय हासिल की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग हर दूसरे परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना से जुड़ा है, इसलिए राज्य को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी कहा जाता है।

श्री धामी ने कहा कि सैनिकों का सम्मान राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सेना का आधुनिकीकरण तेजी से हो रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों में ::, सुरंग और अन्य रणनीतिक आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवादी घटनाओं पर केवल निंदा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से निर्णायक जवाब देने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच कारगिल विजय दिवस नहीं मनाया गया, जिससे शौर्य का अपमान हुआ। उन्होंने कहा कि देश सर्वोपरि है और सैनिकों के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए अनेक कदम उठा रही है। शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है। बलिदानी सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने, नौकरी-पूर्व प्रशिक्षण, पुत्री विवाह सहायता तथा वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र विजेताओं के लिए अनुग्रह राशि 50 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ की गई है। देहरादून के गुनियाल गांव में निर्माणाधीन सैन्य धाम अंतिम चरण में है, जबकि खटीमा-टनकपुर के बीच भव्य सैन्य स्मारक स्थापित करने का भी संकल्प लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवामुक्त अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए देश का पहला अग्निवीर रोजगार सेल स्थापित किया जाएगा। पुलिस, वन विभाग तथा अन्य सरकारी सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने, स्वरोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष सहायता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के शस्त्र लाइसेंस संबंधी लंबित मांग पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और इस पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। साथ ही सैन्य परिवारों से जुड़े भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

देशभक्ति कविताओं से गूंजा मंच, श्रोताओं को किया भाव-विभोर

कार्यक्रम में कवि गजेंद्र सोलंकी ने अपनी ओजस्वी रचना 'उठ जाग भारत...'का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं में देशभक्ति का जोश भर दिया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। वहीं कवयित्री महिमा श्री ने 'सबसे सुंदर, सबसे प्यारा उत्तराखंड है मेरा...' कविता का पाठ करते हुए मातृभूमि की पवित्रता, अखंडता और उत्तराखंड की सांस्कृतिक गौरवगाथा को सशक्त स्वर दिया। अन्य कवियों की प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्रीकांत श्री ने किया। उन्होंने संचालन के साथ एक से बढ़कर एक ओजपूर्ण देशभक्ति कविताओं का पाठ कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने श्रोताओं का भरपूर उत्साहवर्धन किया और पूरे कार्यक्रम को गरिमामय बना दिया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, बलिदानियों के परिजन और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।----------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय