कुंभ प्रशिक्षण में तीन साै पुलिसकर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

 


हरिद्वार, 18 अगस्त (हि.स.)। आगामी कुंभ मेला की तैयारियों के तहत सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र हरिद्वार में पुलिसकर्मियों का छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी है। प्रशिक्षण के चतुर्थ चरण में 300 पुलिसकर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) नरेश चौधरी ने दो बैचों को कुंभ मेले की परंपराओं, धार्मिक महत्व और पुलिस की भूमिका के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया।

डॉ. नरेश चौधरी ने प्रशिक्षणार्थियों को कुंभ मेले के इतिहास, परंपराओं और अवधारणा की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा प्रहरी, मार्गदर्शक, संकट प्रबंधक और मानव सेवा की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि कुंभ को समझने के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि करोड़ों श्रद्धालु नदी में स्नान के लिए एकत्र होते हैं। कुंभ को समझने का अर्थ श्रद्धालुओं के मनोविज्ञान, आस्था, साधु-संतों की परंपराओं, अखाड़ों की व्यवस्था और विशाल भीड़ के सुरक्षित संचालन को समझना है।

प्रो. चौधरी ने कहा कि कुंभ केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि आस्था का महासंगम है। यह संतों-साधुओं, विभिन्न धार्मिक परंपराओं, ज्ञान-दर्शन और भारत की विविध संस्कृतियों के संगम के साथ करोड़ों श्रद्धालुओं की सामूहिक आस्था का अद्भुत प्रदर्शन है। उन्होंने बताया कि यूनेस्को ने भी कुंभ की परंपरा को भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कुंभ के प्रमुख धार्मिक पक्ष अमृत (शाही) स्नानों, अखाड़ों की भूमिका और उनके इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों के लिए अखाड़ों की परंपराओं और व्यवस्थाओं को समझना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि कुंभ के दौरान धार्मिक आयोजनों और विशाल भीड़ का बेहतर समन्वय किया जा सके।

डॉ. नरेश चौधरी ने वर्ष 1986 के कुंभ, 1992 के अर्द्धकुंभ, 1998 के कुंभ, 2004 के अर्द्धकुंभ, 2010 के कुंभ, 2016 के अर्द्धकुंभ और 2021 के कुंभ सहित प्रयागराज, उज्जैन और नासिक कुंभ में अपने कार्यों के अनुभव भी प्रशिक्षणार्थियों के साथ साझा किए। उनके अनुभवों से पुलिसकर्मियों को कुंभ मेले के दौरान आने वाली विभिन्न परिस्थितियों और चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी मिली।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला