भारत विश्व के 12 मेगा जैव विविधता वाले देशों में शामिल: डॉ. ललित तिवारी

 


नैनीताल, 29 मार्च (हि.स.)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के अतिथि व्याख्याता निदेशालय के निदेशक डॉ. ललित तिवारी ने रविवार को वर्धमान कॉलेज बिजनौर में आयोजित ‘विकसित भारत 2047’ कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित व्याख्यान दिया और जलवायु परिवर्तन के जैव विविधता पर प्रभाव और वर्ष 2047 तक भारत के विकास के लक्ष्य पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

डॉ. तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक भारत को एक सशक्त और विशिष्ट राष्ट्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के 12 मेगा जैव विविधता वाले देशों में शामिल है और जैव विविधता वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है, किन्तु जलवायु परिवर्तन से वनस्पति और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, पलायन रोकने और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता भी बताई। कार्यक्रम में डॉ. तिवारी को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. मित्तल, डॉ. चारु दत्त, डॉ. मुकेश व डॉ. अनामिका सहित प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी