हरीश रावत ने ‘इंडिया गठबंधन’ और सामाजिक संगठनों संग किया संवाद

 


देहरादून, 06 मई (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को ‘इंडिया गठबंधन’ और विभिन्न सामाजिक संगठनों के नेताओं के साथ व्यापक संवाद कर देश और राज्य के समक्ष उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। बैठक में संविधान और लोकतंत्र के समक्ष बताए जा रहे खतरों का मुकाबला करने के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।

हरीश रावत ने कहा कि भविष्य में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए अलग-अलग समूह बनाए जाएंगे, जो राज्यभर में विभिन्न वर्गों और संघर्षरत संगठनों से संवाद स्थापित करेंगे। इनमें कर्मचारी संगठन, भूमिहीन, मलिन बस्तियों के निवासी, वरिष्ठ नागरिक, शिक्षक, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कर्मचारी, भोजन माताएं, अतिथि शिक्षक और उपनल कर्मी शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं इन संवाद कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करेंगे और प्रदेश के सभी क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेंगे।

बैठक में भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी को बिंदुखत्ता सहित भूमिहीनों के मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक अलग समूह गठित करने पर भी सहमति बनी। विभिन्न जनसंघर्षों को समर्थन देने और उन्हें आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

समाजवादी पार्टी के नेता एसएन सचान ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनकल्याण के बजाय पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

वहीं भाकपा से जुड़े समर भंडारी ने कहा कि सरकार कॉरपोरेट हितों के लिए भूमि एकत्र कर रही है, जिससे लोकतंत्र और संविधान पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता शंकर गोपाल ने मलिन बस्तियों के मालिकाना हक से जुड़े न्यायालयीय फैसलों की जानकारी साझा की।

बैठक में सर्वोदया आंदोलन,पहाड़ी पार्टी और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। वक्ताओं ने एकजुट होकर जनसंघर्षों को मजबूत करने और राज्यव्यापी संवाद अभियान चलाने पर सहमति व्यक्त की।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय