भारत को जानना ही भारतीय नववर्ष की आत्मा को समझना: गजेन्द्र सिंह

 




- सांस्कृतिक एकता और वसुधैव कुटुंबकम के संदेश पर दिया जोर

- लोकगीत, नृत्य प्रस्तुतियों से सजी नववर्ष पूर्व संध्या की सांस्कृतिक संध्या

देहरादून, 18 मार्च (हि.स.)। भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक एवं संघ के पूर्व प्रांत संघचालक गजेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत एक मृत्युंजय राष्ट्र है, जो आदि और अनंत है। भारतीय नववर्ष को समझने के लिए भारत को जानना आवश्यक है।

बुधवार शाम सजग सांस्कृतिक समिति एवं जन कल्याण न्यास की ओर से नववर्ष की पूर्व संध्या पर आयोजित सांस्कृतिक समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब हम भारत को जान लेंगे, तभी उसके प्रति सच्ची प्रीति विकसित होगी। उन्होंने संत रविदास, गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह, स्वामी विवेकानंद तथा संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, जिस पर चलते हुए भारत आज एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता और संघर्ष के दौर में विश्व के देश आशा भरी नजरों से भारत की ओर देख रहे हैं। वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र को साकार करने के लिए सभी प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होना आवश्यक है।

कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध लोक गायक सौरभ मैठाणी ने ‘मी पहाड़ों को रैबासी तू दिल्ली रौण वाली’ और ‘जख औंदी हवा सराररा’ जैसे गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा राजस्थानी लोक नृत्य ‘कालो कूद पड़ो मेले में’, देशभक्ति गीत ‘कंधों से मिलते हैं कंधे’ तथा डांडिया रास और प्रतिभा श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रस्तुत देशभक्ति नृत्य ने भी खूब सराहना बटोरी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योगपति अशोक विण्डलस ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन समिति के संरक्षक 90 वर्षीय कर्नल मदन मोहन चौबे ने किया। संचालन समिति के संरक्षक राजेन्द्र पन्त द्वारा किया गया।

इस अवसर पर समिति के संरक्षक जोगेन्द्र पुण्डीर, अध्यक्ष पवन शर्मा, उपाध्यक्ष संजीव जैन, दीपा बछेती, चन्द्र मोहन गौड़, प्रमोद बर्थवाल, राकेश बहुगुणा, कमल दुरेजा, रणवीर तोमर सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।---------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय