शिक्षक ही राष्ट्र के चरित्र का निर्माता, गुरुकुल कांगड़ी में गुरुजनों का सम्मान
हरिद्वार, 05 सितंबर (हि.स.)। शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य और चरित्र का निर्माता होता है। इसी भावना के साथ गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय विभाग में शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अपने संबोधन में मुख्याधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने कहा कि शिक्षक ब्रह्मचारियों के प्राण होते हैं। ब्रह्मचारियों का हृदय अत्यंत कोमल होता है और उस पर अंकित होने वाला प्रत्येक संस्कार जीवनभर उनके चरित्र में झलकता है। विद्या मनुष्य के सर्वांगीण विकास का श्रेष्ठ माध्यम है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के कारण गुरुकुल की ख्याति पिछले 124 वर्षों से बनी हुई है।
प्रधानाचार्य डॉ. विजेन्द्र शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल के ब्रह्मचारियों में ही देश का भविष्य निहित है। यही विद्यार्थी आगे चलकर आर्य परंपरा को आगे बढ़ाएंगे और महर्षि दयानंद सरस्वती के आदर्शों के अनुरूप भारत निर्माण में योगदान देंगे।
गुरुकुल कांगड़ी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविकांत मलिक ने कहा कि गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है और जीवन में सदैव गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। बाल सभा के अध्यक्ष अमर सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। कार्यक्रम के संयोजक वेदपाल सिंह ने कहा कि गुरुकुल में सभी पर्व आर्य पद्धति से मनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य ब्रह्मचारियों में श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करना है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला