नीट परीक्षा रद्द होना युवाओं के भविष्य के साथ घोर अन्याय: गोदियाल
देहरादून, 12 मई (हि.स.)। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने चिकित्सा-स्नातक के पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिये एक अर्हक परीक्षा नीट 2026 परीक्षा रद्द किए जाने के निर्णय को देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की विफल, असंवेदनशील और भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
गोदियाल ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों ने वर्षों की मेहनत, मानसिक तनाव और परिवारों के आर्थिक त्याग के बाद इस परीक्षा में भाग लिया था। उत्तराखंड के भी लगभग 21,000 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। अब परीक्षा रद्द होने से इन सभी छात्रों और उनके अभिभावकों को भारी मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी परीक्षा पे चर्चा तो करते हैं, लेकिन उनकी सरकार परीक्षा की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। पिछले दस वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक हुए और 48 परीक्षाएं दोबारा आयोजित करनी पड़ी। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मोदी सरकार के शासनकाल में युवाओं के सपनों के साथ लगातार खिलवाड़ किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नकल माफिया, भ्रष्ट अधिकारियों और सत्ता के संरक्षण के बिना इस प्रकार के संगठित अपराध संभव नहीं हैं। जब तक राजनीतिक संरक्षण समाप्त नहीं होगा, तब तक पेपर लीक की घटनाएँ रुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने ने कहा कि उत्तराखंड भी इस कड़वी सच्चाई का साक्षी रहा है। भाजपा शासन के पिछले आठ-नौ वर्षों में अनेक भर्ती परीक्षाएं विवादों में घिरी है। कहीं प्रश्नपत्र लीक हुए, कहीं वर्षों तक परिणाम घोषित नहीं हुए और कहीं परिणामों में भाई-भतीजावाद एवं पक्षपात के गंभीर आरोप लगे। कई मामलों में सत्ता पक्ष से जुड़े व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई और गिरफ्तारियां भी हुईं। इससे स्पष्ट है कि भाजपा शासन में भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और उनके भविष्य के साथ विश्वासघात है। देश का युवा अपने परिश्रम के आधार पर अवसर चाहता है, लेकिन भाजपा सरकार उसे पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व समयबद्ध जांच कर दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाए, छात्रों और अभिभावकों को हुई आर्थिक एवं मानसिक क्षति की भरपाई की जाए, पुनर्परीक्षा के लिए पर्याप्त समय और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, राष्ट्रीय व राज्य स्तर की परीक्षा प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक सुधार किए जाएं व नकल माफिया और उनके राजनीतिक संरक्षण की पूरी श्रृंखला को बेनकाब किया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल