राज्यपाल ने ‘उत्तराखंड डीप-टेक 2030’ का किया शुभारंभ, पहाड़ की समस्याओं के तकनीकी समाधान पर जोर

 


- एआई से शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और सीमावर्ती सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा : राज्यपाल

देहरादून, 10 अक्टूबर (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने शनिवार को लोक भवन में ‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030 : पहाड़ के लिए तकनीक का निर्माण’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का लाभ प्रदेश के दूरस्थ गांवों तक पहुंचना चाहिए। तकनीक का वास्तविक उद्देश्य आम लोगों के जीवन को आसान बनाना और पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करना है।

कार्यक्रम में रक्षा, शिक्षा, उद्यमिता और रचनात्मक उद्योगों से जुड़े विशेषज्ञों ने एआई और उन्नत तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग पर विचार-विमर्श किया। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में तकनीक की मदद से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और प्रशासन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। साथ ही, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और स्थानीय आजीविका से जुड़ी समस्याओं के समाधान भी विकसित किए जा सकते हैं।

राज्यपाल ने युवाओं से नवाचार और तकनीक के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। युवा ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करें, जो पहाड़ के किसानों, सैनिकों, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों के लिए उपयोगी हों।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवीय बुद्धि का विकल्प नहीं बल्कि क्षमताओं को बढ़ाने का माध्यम है। तकनीकी विकास के साथ मानवीय मूल्यों, अनुशासन और अच्छे चरित्र को बनाए रखना भी जरूरी है। डीपफेक, भ्रामक सूचनाओं और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसी चुनौतियों को देखते हुए एआई का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में तीन विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा में एआई के दौर में रक्षा, नेतृत्व, उभरती तकनीकों और हिमालयी सुरक्षा पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों कैप्टन याशिका हटवाल त्यागी, लेफ्टिनेंट कर्नल नरेन ठाकुर, मेजर कविश अग्रवाल, कमांडर कुलदीपक मित्तल और मेजर आर.एस. साम्ब्याल ने भाग लिया।

दूसरी चर्चा में उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप और उत्तराखण्ड के युवाओं को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के कुलपतियों, प्राध्यापकों तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने विचार रखे।

तीसरी चर्चा में रचनात्मकता, स्टार्टअप और एआई आधारित अर्थव्यवस्था में उभरते अवसरों पर मंथन हुआ। इसमें अभिनेता मुकेश तिवारी, अभिनेत्री राधा भट्ट, लाइफ कोच राधिका चोपड़ा, डिजिटल क्रिएटर मेघा चौबे तथा तकनीकी और उद्यमिता क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में लेखिका एवं अधिवक्ता विदुषी निशंक, समर्थानम ट्रस्ट के असिस्टिव टेक्नोलॉजीज एक्सेलेरेटर के निदेशक जयंत श्रीनिवास और अभिनेता दिलीप ताहिल सहित विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने भी विचार साझा किए।

इस अवसर पर सचिव पंकज कुमार पाण्डे, अपर सचिव रीना जोशी, टेक्नो हब के सीटीओ सिद्धार्थ माधव, दून विश्वविद्यालय से जुड़े प्रतिनिधि, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, उद्यमी और विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय