गैरसैंण में दो दिवसीय सत्र कर लोकतांत्रिक परंपराओं की रस्म अदायगी कर रही सरकार : यशपाल आर्य
देहरादून, 22 अक्टूबर (हि.स.)। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने गैरसैंण में विधानसभा का अंतिम सत्र केवल दो दिन का रखने पर राज्य सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं की औपचारिकता निभा रही है। उन्होंने सत्र से संबंधित महत्वपूर्ण बैठकें देहरादून में आयोजित किए जाने पर भी सवाल उठाए।
यशपाल आर्य ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा कि विधानसभा का सत्र गैरसैंण में आयोजित किया जा रहा है, लेकिन कार्यमंत्रणा समिति और विधानमंडल दलों के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें देहरादून में हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सत्र की कार्यसूची और कार्यवाही तय करने वाली बैठकें भी गैरसैंण में होनी चाहिए थीं। इससे ग्रीष्मकालीन राजधानी की गरिमा और संसदीय परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित होता।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश की भावनाओं और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में विधानसभा के अंतिम सत्र को मात्र दो दिनों तक सीमित रखना जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंचम विधानसभा के पूरे कार्यकाल में सदन की बैठकें कम दिनों तक हुई हैं। बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे जनता के सवाल उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने के अवसर सीमित होते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्र से तीन दिन पहले वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों को देहरादून बुलाने का निर्णय प्रदेशभर में आयोजित परिवर्तन रैलियों में उनकी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका सदन के साथ-साथ जनता के बीच जाकर उनके मुद्दे उठाने की भी है। कांग्रेस इन मुद्दों को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाती रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से विधानसभा के अंतिम सत्र की अवधि बढ़ाने और कार्यमंत्रणा समिति सहित विधानमंडल दलों के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें गैरसैंण में आयोजित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को संसदीय मर्यादाओं, लोकतांत्रिक परंपराओं और गैरसैंण की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय