पर्यावरण संरक्षण में सेना की भूमिका: देहरादून के एफआरआई में विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित

 


-पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा में संतुलन जरूरी: ऋचा मिश्रा

देहरादून, 10 जुलाई (हि.स.)। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में शुक्रवार को भारतीय सेना के अधिकारियों एवं जवानों के लिए वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं सतत प्रबंधन विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सैन्य गतिविधियों के दौरान पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकीय संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

संस्थान के बोर्ड रूम में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन एफआरआई की निदेशक ऋचा मिश्रा ने किया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज गुरुंग, मेजर पी.सी. मिश्रा सहित लगभग 45 सैन्य कर्मियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

ऋचा मिश्रा ने कहा कि भारतीय सेना जहां राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, वहीं वन जलवायु संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता संरक्षण और आजीविका के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य रक्षा तैयारियों और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना है।

प्रशिक्षण के दौरान सेना के अधिकारियों और जवानों को संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं की जानकारी दी गई। इसमें फायरिंग रेंज में वनस्पतियों एवं वन्यजीवों की पहचान, वन्यजीवों के प्रजनन संबंधी सावधानियां, प्रदूषण नियंत्रण तथा क्षतिग्रस्त भू-दृश्यों के पुनर्स्थापन जैसे विषय शामिल रहे।

एफआरआई के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एन. बाला ने क्षतिग्रस्त वन भूमि के पुनर्स्थापन पर व्याख्यान दिया, जबकि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार शर्मा ने सैन्य फायरिंग रेंज में वन्यजीवों के व्यवहार, प्रजनन और संरक्षण संबंधी पहलुओं पर जानकारी दी। अन्य विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, प्रदूषण प्रबंधन और मिट्टी, जल और वायु पर सैन्य गतिविधियों के प्रभाव को कम करने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में एफआरआई के ग्रुप कोऑर्डिनेटर (रिसर्च) डॉ. डी.पी. खाली, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. वी.पी. पंवार, पब्लिसिटी एवं लाइज़निंग अधिकारी डॉ. तारा चंद, विभिन्न प्रभागों के अध्यक्ष, वैज्ञानिक और वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन प्रभाग के तकनीकी विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय