धनतेरस आज, खरीदारी के लिए शाम का मुहूर्त शुभ, सोना-चांदी से लेकर झाड़ू तक खरीदने की परंपरा
हरिद्वार, 05 नवंबर (हि.स.)। दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
ज्योतिषाचार्य पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के अनुसार, इस बार धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर सोना-चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन सहित कई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री ने बताया कि धनतेरस को धन त्रयोदशी भी कहा जाता है। इस वर्ष त्रयोदशी तिथि शुक्रवार, 6 नवंबर को सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर शनिवार, 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस की शाम भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। प्रदोष काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
पूजा के प्रमुख मुहूर्त
प्रदोष कालः शाम 5.50 बजे से रात 8.24 बजे तक।
वृषभ कालः शाम 6.20 बजे से रात 8.16 बजे तक।
विशेष पूजा मुहूर्त: शाम 6.20 बजे से रात 8.16 बजे तक।
ज्योतिषाचार्य पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के मुताबिक, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और बरकत आती है। इसके अलावा पीतल और तांबे के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी से संबंधित माना गया है।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन उनकी पूजा कर लोग अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं। धनतेरस का पर्व धन के साथ-साथ स्वास्थ्य और खुशहाली का संदेश भी देता है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला