प्राध्यापकों की बैठक में स्वायत्तता पर चर्चा

 


नैनीताल, 20 जनवरी (हि.स.)। डीएसबी परिसर में मंगलवार को प्राध्यापकों की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1973 में स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के कारण ही यहां के शिक्षक व विद्यार्थी पद्म भूषण, पद्मश्री सहित अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हुए हैं। प्राध्यापकों ने कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम व स्टेट्यूट्स के अंतर्गत संचालित यह संस्थान बेहतर ज्ञान सृजन और मानव संसाधन निर्माण के उद्देश्य से स्वायत्त बनाया गया है।

बैठक में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को नियमों के विपरीत बताते हुए इसमें असहयोग करने का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था लागू नहीं है और इसे थोपने का विरोध किया जाएगा। साथ ही संविदा शिक्षकों के हर छह माह में सेवा विस्तार को अव्यावहारिक बताते हुए इस पर भी आपत्ति जताई गई। प्राध्यापकों ने स्पष्ट किया कि उनकी उपस्थिति पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार ही मानी जाए।

बैठक के बाद कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सांसद, विधायक, कुलपति, कुलसचिव व निदेशक को विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग को लेकर ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया। मोबाइल व बायोमेट्रिक आधारित उपस्थिति से जुड़े डेटा की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की गई। बैठक में बड़ी संख्या में प्राध्यापक उपस्थित रहे और अंत में विश्वविद्यालय बचाओ आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलाने का निर्णय लिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी