हरिद्वार बनेगा भिक्षावृत्ति मुक्त : जिलाधिकारी

 


हरिद्वार, 14 जुलाई (हि.स.)। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में मंगलवार को एनआईसी सभागार में हरिद्वार को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की कार्ययोजना पर बैठक हुई। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों ने विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश लिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि हरिद्वार को ऐसा शहर बनाया जाए जहां कोई मजबूरी में भीख न मांगे। जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन, आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने मंदिरों, घाटों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशन पर भिक्षावृत्ति करने वालों का सर्वेक्षण कर उनकी आयु, स्वास्थ्य, परिवार और आजीविका का विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। भिक्षावृत्ति कर रहे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों की अलग श्रेणी बनाई जाए।

पुनर्वास के लिए अस्थायी और स्थायी आश्रय गृह, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और नशामुक्ति की सुविधा देने पर बल दिया गया। पुनर्वासित लोगों को कौशल प्रशिक्षण देकर उद्योग, होटल और सेवा क्षेत्र से जोड़ने तथा स्वयं सहायता समूहों से आर्थिक सहायता देने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने कहा बाल भिक्षावृत्ति रोकने को विशेष अभियान चलाया जाएगा। भीख मांगने वाले बच्चों का स्कूल में प्रवेश, छात्रवृत्ति, पोषण और आवासीय शिक्षा सुनिश्चित होगी। बाल श्रम और तस्करी के मामलों में कड़ी कार्रवाई होगी।

जन-जागरूकता अभियान चलाने और सोशल मीडिया, रेडियो से लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि भीख देने के बजाय जरूरतमंदों को पुनर्वास योजनाओं से जोड़ें।

इस कार्य योजना को आगे बढ़ाने के लिए विभागों में समन्वय और मासिक समीक्षा बैठक का निर्णय लिया गया। शिकायत के लिए हेल्पलाइन और पोर्टल भी बनेगा।

बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन जितेंद्र कुमार, सीओ सदर एसपी बलूनी, जिला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चन्द, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुबोध शर्मा, उप नगर आयुक्त श्याम सुंदर दास, उप नगर आयुक्त रुड़की अमरजीत कौर, एसीएमओ डॉ. कुंदन कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला