हरिद्वार में छह हाथियों के गले में लगेगा रेडियो कॉलर, कुंभ से पहले होगी तैयारी
हरिद्वार, 31 अक्टूबर (हि.स.)। जंगल से निकलकर खेतों और रिहायशी इलाकों में उत्पात मचाने वाले जंगली हाथियों पर अब तकनीक से नजर रखी जाएगी। वन विभाग ने आबादी का रुख करने वाले 18 हाथियों को चिह्नित किया है। इनमें से छह हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे। ये हाथी झुंड के मुखिया हैं, जिनके पीछे दूसरे हाथी चलते हैं। विभाग का लक्ष्य कुंभ मेले से पहले सभी छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने का काम पूरा करना है।
रेडियो कॉलर लगने के बाद हाथियों की लोकेशन और उनकी आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी। इससे हाथियों के आबादी की ओर बढ़ने की जानकारी मिलते ही वन विभाग समय रहते लोगों को सतर्क करने के साथ ही जरूरी कदम उठा सकेगा। इसके लिए कमांड कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जा रहा है।
हरिद्वार के श्यामपुर, जगजीतपुर, बिलकेश्वर, चिड़ियापुर, पथरी और जंगल से सटे कई इलाकों में हाथियों की आवाजाही बनी रहती है। भोजन की तलाश में हाथियों के झुंड अक्सर खेतों और आबादी तक पहुंच जाते हैं। इससे लोगों की जान पर खतरा मंडराने के साथ ही फसलों, मकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचता है।
हाल ही में लालढांग क्षेत्र में खेत में काम कर रहे एक किसान की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। वहीं, श्यामपुर में हाईवे पर एक राहगीर की गाड़ी पर हाथी ने हमला कर दिया था। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जहां लोगों की जान जा रही है, वहीं हाथियों की सुरक्षा भी चुनौती बनी हुई है।
विशेषज्ञों की टास्क फोर्स ने चिह्नित किए 18 हाथी
समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में वन विभाग ने विशेषज्ञों को शामिल करते हुए टास्क फोर्स गठित की है। प्रमुख वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। टीम में वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वैज्ञानिकों के साथ पशु चिकित्सक भी शामिल हैं। टास्क फोर्स ने कई दिनों तक हरिद्वार में रहकर हाथियों की गतिविधियों का अध्ययन किया। इसके बाद आबादी की ओर आने वाले 18 हाथियों की पहचान की गई। इनमें से छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया गया है। विभाग के अनुसार, इसके लिए सभी आवश्यक अनुमतियां मिल चुकी हैं। अगले सप्ताह विशेष टीम हरिद्वार पहुंचेगी।
सोलर फेंसिंग और एलीफैंट ट्रेंच से भी होगी सुरक्षा
हाथियों की निगरानी के साथ जंगल से सटे इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे हैं। इसके तहत सोलर फेंसिंग और एलीफैंट ट्रेंच बनाने का काम चल रहा है। वन क्षेत्र में वॉच टावर बनाए जा रहे हैं। साथ ही हाथी मित्र के रूप में कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, ताकि हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने और स्थानीय लोगों को सतर्क करने में मदद मिल सके।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला