नैनीताल डीएसए मैदान में अता की गई ईद-उल-जुहा की नमाज
नैनीताल, 28 मई (हि.स.)। सरोवर नगरी नैनीताल में गुरुवार को ईद-उल-जुहा की नमाज उत्तराखंड उच्च न्यायालय की एकलपीठ के आदेश के बाद हर्षोल्लास के साथ अता की गई। मल्लीताल स्थित डीएसए मैदान में हजारों नमाजियों ने पुलिस एवं प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नमाज अता कर देश, प्रदेश और कौम की खुशहाली और अमन-चैन की दुआ मांगी।
नमाज के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उप जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किये गये थे। बताया गया कि इस बार पूर्व वर्षों की तुलना में नमाजियों की संख्या कुछ कम रही। इस दौरान तल्लीताल क्षेत्र से मल्लीताल की ओर आने वाले कुछ नमाजियों को तल्लीताल मस्जिद में ही नमाज अता करने के लिए कहा गया।
जानकारी के अनुसार तल्लीताल मस्जिद के इमाम पहले ही मल्लीताल में नमाज अता करा चुके थे, जिस कारण बाद में छोटी मस्जिद में नमाज की व्यवस्था की गई। कुछ लोगों ने कहा कि जीवन में पहली बार उन्हें नमाज के लिए रोका गया।
उल्लेखनीय है कि 26 मई को डीएसए मैदान में परंपरागत रूप से ईद की नमाज की अनुमति डीएसए महासचिव ने दी थी, लेकिन बाद में नियमों की जानकारी न होने का कारण बताते हुए अनुमति निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद मामला 27 मई को उत्तराखंड उच्च न्यायालय की एकलपीठ के समक्ष पहुंचा। न्यायालय ने प्रशासन के अनुमति निरस्त करने के आदेश पर रोक लगाते हुए डीएसए मैदान में नमाज अता करने की अनुमति प्रदान की थी।
इसी बीच 27 मई को इस प्रकरण में एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से एकलपीठ के आदेश के विरुद्ध विशेष अपील दायर किये जाने की चर्चा के बाद उच्च न्यायालय परिसर में हलचल बढ़ गई। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सोहेल अहमद सिद्दीकी ने बताया कि उन्हें रात्रि लगभग 10:30 बजे विशेष अपील दायर होने की सूचना मिली, जिसके बाद वे अन्य लोगों के साथ उच्च न्यायालय पहुंचे।
अधिवक्ता के अनुसार रात्रि में विशेष अपील से संबंधित नोटिस की प्रति उपलब्ध कराई गई। देर रात कोई सुनवाई नहीं हुई। इस कारण उच्च न्यायालय की एकलपीठ का पूर्व आदेश प्रभावी बना रहा और उसी के आधार पर डीएसए मैदान में नमाज अता की गई।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर पूर्व में सख्त निर्देश दिये थे। इसके बाद प्रशासन ने डीएसए मैदान में नमाज की अनुमति देने से इनकार किया था। बाद में यह प्रकरण कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी