ऋषिहुड विश्वविद्यालय के 310 विद्यार्थियों ने जाना भारतीय शिक्षा दर्शन
हरिद्वार, 04 अक्टूबर (हि.स.)। मानवीय व्यवहार के प्रति संवेदनशीलता, आचार-विचार और संस्कारों की शिक्षा युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है। इसी उद्देश्य से भारतीय शिक्षा दर्शन और आधुनिक अकादमिक दृष्टि के अनुभवों को समझने तथा संवाद करने के लिए ऋषिहुड विश्वविद्यालय, सोनीपत के 310 छात्र-छात्राओं के दल ने रविवार को गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया।
विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित स्वागत कार्यक्रम का संयोजन प्रो. एलपी पुरोहित ने किया। कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने शैक्षिक भ्रमण और संवाद को विद्यार्थियों के लिए प्रेरक बताया। कार्यक्रम संयोजक एवं उपकुलसचिव डॉ. श्वेतांक आर्य ने कहा कि युवाओं की चारित्रिक उन्नति, स्वभाव में सरलता और वैचारिक प्रखरता के लिए संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है।
मुख्य वक्ता वैदिक एवं आर्य परंपराओं के विद्वान संस्कृताचार्य प्रो. ब्रह्मदेव विद्यालंकार ने विद्यार्थियों को गुरुकुलीय परंपराओं की छात्र जीवन में उपयोगिता और वर्तमान समस्याओं के समाधान में उनकी भूमिका से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था आचार-विचार, संस्कार, संस्कृति और आपसी समन्वय का जीवंत उदाहरण है। मुंशीराम से स्वामी श्रद्धानंद बनने तक की यात्रा गुरुकुलीय परंपराओं के संरक्षण व संवर्धन की प्रेरक मिसाल है।
उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा मातृवान, पितृवान और आचार्यवान के स्वरूप का निर्माण करते हुए व्यक्ति को बेहतर मनुष्य बनने की दिशा देती है। वर्तमान समय में मानवीय संवेदनाओं में आ रही कमी और आपसी भेदभाव से बढ़ती दूरी चिंता का विषय है। शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के माध्यम से पर्यावरणीय संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाशे जा सकते हैं। इसके लिए युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों को समझना आवश्यक है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण भी किया गया। ऋषिहुड विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. कनिष्का शर्मा, एकेडमिक डीन प्रो. मनोज कन्नन, सहायक निदेशक प्रो. माहित चौधरी, सस्टेक, वत्सला सिंह और न्यूटन ने गुरुकुल कांगड़ी के शिक्षकों को शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमांशु पंडित एवं डॉ. शिखा ने किया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो. सीमा शर्मा, प्रो. बिंदु अरोड़ा, उपकुलसचिव डॉ. श्वेतांक आर्य, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवकुमार चौहान, डॉ. विपुल भट्ट, नोडल सुरक्षा दुष्यंत सिंह राणा, डॉ. मनोज कुमार, मदनलाल जाट, प्रवीण कुमार, राजवीर सिंह सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी मौजूद रहे।
वैदिक प्रार्थना एवं शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ऋषिहुड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने गुरुकुल कांगड़ी के अनुभव को जीवनोपयोगी तथा समस्याओं के समाधान की दिशा में व्यापक एवं प्रभावी पहल बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला