सूखे की मार : संकट में  सेब के बागवान

 


उत्तरकाशी, 11 जनवरी (हि.स.)। सेब उत्पादन में जनपद हिमाचल के सांगला वैली की तर्ज पर उभर चुका लेकिन यहां अपर्याप्त बारिश और बर्फबारी के कारण सेब के बगीचों में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। जनवरी माह लगने के बावजूद सूखे की स्थिति बनी हुई है। इससे बागों में पौधों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है।

उत्तरकाशी जिले में प्रतिवर्ष करीब चार हजार से अधिक मीट्रिक टन का कारोबार होता है। मगर आगामी सीजन को लेकर बागवानी विशेषज्ञ और बागवानों में चिंता पैदा हो गई है।

बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार सेब की बेहतरीन फसल के लिए 1600 घंटे के चिलिंग आवर्स (ठंडा तापमान) का होना बेहद जरूरी होता है। मौजूदा सूखे के हालात के कारण यह आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यह सूखा जारी रहा तो अप्रैल में होने वाली महत्वपूर्ण सेब फ्लावरिंग (फूल खिलने की प्रक्रिया) पर संकट छा सकता है। इससे पूरी फसल प्रभावित होगी।

हर्षिल से दिनेश रावत, से बगोरी निवासी भगवान सिंह , धराली के जय भगवान सिंह,

सुक्की निवासी युद्धवीर सिंह राणा ने

बंगाणा क्षेत्र राजपाल राणा दुधारा, मनीष राणा, समशेर राणा, अकबर सिंह भाषा,

गणपत सिंह राणा पुत्र स्व. खडक सिंह राणा, भाटिया गांव में श्याम डोभाल, आजाद डिमरी,

नौगांव जगमोहन चंद, सरनौल मेघ नाथ, रणवीर, बृजमोहन सेमवाल ने बताया कि बारिश और बर्फबारी न होने से सेब बगीचों में नए पौधे लगाने और बागवानी संबंधी अभी कार्य ठप हो गए हैं। हर्षिल, धराली,मुखवा, बगोरी, सुक्की, झाला, समेत यमुना वैली में सेवरी फल पट्टी, आराकोट बंगाणा, मोरी क्षेत्र में

के पंचगाई समेत नौगांव ब्लॉक के सरनौल इलाके में सेब के बगीचे हैं।

सेब के पौधे वूली एफिड, पेपरी बार्क और केंकर जैसी बीमारियों की चपेट

मौसम की मार अबकी बार सेब पर भी दिखने लगी है। सूखे और अधिक तापमान के चलते प्रदेश में सेब के बागीचों में अबकी बार फ्लावरिंग समय से पहले होने के आसार बन गए हैं। अनुकूल मौसम न होने से कई जगह बागीचों में चिलिंग आवर्स पूरे न होने की संभावना बनी हुई है। निचले और मध्यम इलाकों में इसकी समस्या आ रही है। इससे सेब की फसल प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

मौसम अबकी बार बागवानी के लिए प्रतिकूल बना हुआ है।अभी तक इलाकों में बर्फबारी नहीं हुई है।आम तौर पर दिसंबर और जनवरी माह में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो जाती थी। फरवरी माह में भी कई बार बर्फ गिरती है, हालांकि यह ज्यादा नहीं टिक पाती। जनवरी में भी अभी तक बर्फ नहीं गिरी है। ऐसे में इससे सेब के बागीचों में सूखा पड़ा हुआ है। मौसम के लगातार साफ रहने से तापमान भी बढ़ने लगा है। इसका सीधा असर सेब के बागो में पड़ रहा है।

लंबे समय से नमी की कमी के कारण सेब के पौधे पहले ही वूली एफिड, पेपरी बार्क और केंकर जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं हैं। बागवानों का कहना है कि बारिश और बर्फबारी न होने से उनके बगीचों में नए पौधे लगाने और बागवानी संबंधी सभी आवश्यक कार्य ठप हो गए हैं। कई बागवान अब देवालयों की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

सूखे से बनी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए हिमाचल के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा है कि इस समय सेब बगीचों को बेहद नमी की जरूरत है। अभी भी बारिश हो जाती है तो अप्रैल में होने वाली फ्लावरिंग के लिए अच्छे संकेत मिल सकते हैं।

जिला उद्यान अधिकारी डॉ रजनीश सिंह ने कहा कि मौसम की बेरुखी से बागवानी के सेहत के लिए ठीक नहीं है, लेकिन 15 जनवरी तक भी यदिबर्फबारी और बारिश होती है तो बागवानी अच्छी हो सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / चिरंजीव सेमवाल