दून पुस्तक महोत्सव : बाल मंडप बना रचनात्मकता का केंद्र, साहित्यिक सत्रों में हुआ मंथन
देहरादून, 10 अप्रैल (हि.स.)। दून पुस्तक महोत्सव के सातवें शुक्रवार को बाल मंडप में रचनात्मकता और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। बारह सौ से अधिक विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे परिसर को ऊर्जा और सृजनात्मकता से भर दिया।
परेड मैदान में आयोजित महोत्सव के दिन की शुरुआत बच्चों के लिए आयोजित म्यूजिकल स्टोरीटेलिंग सत्र से हुई,जिसमें स्वाति गोयल ने रोचक कहानियों और संगीत के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति को नई उड़ान दी। वहीं 'गंगा – द क्रैडल ऑफ लाइफ' कार्यशाला में डॉ. संगीता अंगोम ने जलीय जीवन और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बेहद सरल और प्रभावी तरीके से समझाया।
मुकेश नौटियाल की ओर से आयोजित 'फूल देई' इलस्ट्रेशन वर्कशॉप ने बच्चों को उत्तराखंड की लोक संस्कृति से जोड़ा,जहां प्रतिभागियों ने पारंपरिक पर्व को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। 'क्वेश्चन टू क्रिएशन' सत्र में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की जानकारी दी गई,जिसमें बच्चों ने डिजिटल शिक्षा और रचनात्मक सोच के नए आयामों को समझा। दिन का समापन सुभाष रावत के 'आर्ट्स-इंटीग्रेटेड लर्निंग' सत्र के साथ हुआ।
साहित्यिक मंच पर वैभव पुरंदरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज,बाल गंगाधर तिलक और विनायक दामोदर सावरकर पर आधारित अपनी पुस्तकों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत के ऐतिहासिक नायकों को समझने के लिए गहन अध्ययन और पठन आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास से बेहतर रूप से जुड़ सके।
एक विशेष संवाद सत्र में कर्नल अजय रैना और ब्रिगेडियर सुशील तनवर के बीच 'अमन के फरिश्ते' पुस्तक पर चर्चा हुई। यह कृति जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद,खुफिया तंत्र और सुरक्षाबलों के संघर्ष की वास्तविकताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।
दिन का समापन सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसमें वंशिका जोशी की पंजाबी, पहाड़ी और बॉलीवुड गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को संगीत,उल्लास और उत्साह से सराबोर कर दिया।
महोत्सव के आगामी सत्रों में डिजिटल इंडिया,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वॉइस मॉड्यूलेशन जैसे समसामयिक विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी,जो विद्यार्थियों और पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक साबित होंगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय