इम्तियाज अली के संवाद और लोक-संगीत से सजा दून पुस्तक महोत्सव

 




देहरादून, 07 अप्रैल (हि.स.)। दून पुस्तक महोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित साहित्यिक सत्रों, संवादों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में मंगलवार का दिन विविधता और रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली का विशेष सत्र मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें उन्होंने अपने सिनेमा और जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए।

इम्तियाज अली ने अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि फिल्मों के प्रति उनका लगाव शुरुआती दिनों से ही रहा। उन्होंने अपनी चर्चित फिल्म ‘रॉकस्टार’ और कश्मीर में फिल्मांकन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए इसे विशेष और यादगार बताया। साथ ही, उन्होंने रेल यात्राओं के प्रति अपने लगाव और सिनेमा के बदलते दर्शक व्यवहार पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि दर्शक अब पुनः सिनेमाघरों की ओर लौट रहे हैं और लंबी अवधि की फिल्मों को भी स्वीकार किया जा रहा है। सत्र में कर्नल आर.एस. सिद्धू और ब्रिगेडियर सुयश शर्मा ने भी सहभागिता करते हुए विभिन्न विषयों पर संवाद किया।

महोत्सव के चिल्ड्रन्स कॉर्नर में चौथे दिन करीब 1000 बच्चों की सहभागिता के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। 'एक्ट इट आउट' सत्र में आस्था और तस्नीम ने अभिनय के माध्यम से कहानी प्रस्तुत की, जबकि 'क्लाउनिंग वर्कशॉप' में बच्चों ने रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रदर्शन किया। “कम्युनिकेशन स्किल्स” सत्र में अभा मैसी ने बच्चों को प्रभावी संवाद कौशल सिखाए। दिन का समापन रामलाल भट्ट के 'पपेट्स इन कम्युनिकेशन' सत्र के साथ हुआ। इसके अतिरिक्त 'ऐपन आर्ट', 'आर्ट एंड क्राफ्ट' और 'कलर मी' जैसी गतिविधियों में बच्चों ने सक्रिय भागीदारी की।

देहरादून साहित्य महोत्सव के अंतर्गत ‘अनुवाद के रचनात्मक आयाम’ विषय पर आयोजित सत्र में कुमाऊनी और गढ़वाली भाषाओं के विशेषज्ञों ने भाषाई विकास और अनुवाद की व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। वक्ताओं ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) की ओर से क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही, विज्ञान और तकनीकी विषयों के अनुवाद में शब्द चयन की जटिलताओं और एआई आधारित अनुवाद की सीमाओं को रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने तकनीकी शुद्धता और आंचलिक भावों के संतुलन को सफल अनुवाद की अनिवार्य शर्त बताया।

सांस्कृतिक सत्र में ‘रहनुमा लाइव’ बैंड की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक और समकालीन संगीत के समन्वय ने महोत्सव को सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की। परेड ग्राउंड में राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर से आए मांगणियार कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ लोक-संगीत की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को राजस्थानी संस्कृति से जोड़ दिया।

महोत्सव के तहत 8 अप्रैल को भी विविध आयोजन प्रस्तावित हैं। बाल मंडप में बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। वहीं वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का विशेष सत्र आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके अतिरिक्त ‘लीडरशिप इन यूनिफॉर्म’ विषय पर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ और वरिष्ठ पत्रकार नीरज राजपूत के साथ संवाद आयोजित होगा। दिन का समापन ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ बैंड की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय