आस्था, अनुशासन, साधना, सनातन संस्कृति का प्रतीक है दण्डवत यात्रा: करौली
हरिद्वार, 30 अक्टूबर (हि.स.)। दंडवत यात्रा आस्था, अनुशासन, साधना और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह विचार मिश्री मठ के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर महाराज ने श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में संतों की मौजूदगी में झंडी दिखाकर भव्य दंडवत यात्रा का शुभारंभ करते हुए व्यक्त किए।
स्वामी करौली शंकर महाराज ने कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि इससे समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है और नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि यात्रा में उमड़े हजारों श्रद्धालु कुंभ-2027 को भव्य-दिव्य बनाने, सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार, धर्म के प्रति जन-जागरण, देश की एकता-अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने, मानव जाति को रोग, शोक, भय, भ्रम और नशा मुक्त करने तथा मां गंगा को स्वच्छ-निर्मल व प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के संकल्प के साथ शामिल हो रहे हैं।
अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत धुनी दास महाराज ने कहा कि दंडवत यात्रा आगामी कुंभ को भव्य-दिव्य बनाने और सनातन संस्कृति के विश्वव्यापी प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कोठारी महंत नितिन दास महाराज ने कहा कि स्वामी करौली शंकर महाराज अखाड़े के गौरव हैं और मंत्र साधना से पीड़ित मानवता को कष्टों से मुक्ति दिला रहे हैं।
यात्रा का शुभारंभ संतों और गणमान्यजनों की उपस्थिति में हुआ, जिसमें देश-दुनिया से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर स्वामी दुर्गेशानंद सरस्वती, सुतीक्ष्ण मुनि, हंसानंद महाराज, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी बुध मुनि, संत गुरमीत सिंह, प्रबंधक डॉ. उमेश सचान, अनिरुद्ध भाटी, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, पार्षद राजेश शर्मा, सचिन कुमार, दीपक शर्मा, गोस्वामी गगनदीप दत्त, डॉ. विशाल गर्ग, अनिरुद्ध शर्मा समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला