जलभराव में डूबी सैकड़ों बीघा फसल, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
हरिद्वार, 01 सितंबर (हि.स.)। लक्सर क्षेत्र में जलभराव के कारण किसानों की फसलें बर्बाद होने की स्थिति हर साल बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लगातार खेतों में पानी भरे रहने से धान समेत अन्य फसलें सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम ने कहा कि व्यवस्था न होने से हर साल यही स्थिति पैदा होती है। लगातार पानी में डूबे रहने से फसलें खराब हो रही हैं। प्रशासन को प्रभावित गांवों में तत्काल टीमें भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन कराना चाहिए। समय रहते सर्वे और राहत प्रक्रिया शुरू होने से किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।
किसान नेता अनिल चौधरी ने कहा कि किसान की फसल बर्बाद होने का असर केवल खेत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सीधे उसके परिवार की रोजी-रोटी पर पड़ता है। किसान देश की रीढ़ है। संकट की इस घड़ी में प्रशासन को कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर उतरकर स्थिति देखनी चाहिए।
पानी कम होते ही होगा सर्वे
लक्सर तहसीलदार दीवान सिंह राणा ने बताया कि खेतों से बारिश का पानी कम होते ही प्रशासन की टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी जाएंगी। टीमें मौके पर जाकर फसलों को हुए नुकसान का सर्वे करेंगी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
किसानों की चार प्रमुख मांगें
किसानों ने प्रशासन से चार मांगें रखी हैं। पहला, प्रभावित गांवों में टीम भेजकर फसलों के नुकसान का निष्पक्ष और वास्तविक सर्वे कराया जाए। दूसरा, सर्वे के आधार पर बिना देरी के राहत राशि और उचित मुआवजा दिया जाए। तीसरा, विधायक और सांसद उनकी समस्या को सरकार के सामने मजबूती से उठाएं। चौथा, हर साल होने वाले जलभराव से निजात दिलाने के लिए नालों और निकासी मार्गों की सफाई कराई जाए तथा स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला