रवासन की धार में बह रही जिंदगियां, फिर भी पुल का इंतजार
हरिद्वार,09 सितंबर(हि. स.)। लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर पुल निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। बरसात में उफनती नदी ग्रामीणों के लिए जानलेवा बन रही है। हाल ही में स्कूल से लौटते समय छात्र आर्यन भट्ट की नदी में बहने से मौत हो गई। इससे पहले भी एक ग्रामीण तेज बहाव में बहकर लापता हो चुका है, जिसका अब तक पता नहीं चला है। लगातार हादसों के बीच बुधवार को हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत समर्थकों और ग्रामीणों के साथ रवासन नदी किनारे पहुंचीं और प्रदर्शन किया।
उन्होंने सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में झूला पुल का काम शुरू नहीं हुआ तो वह नदी किनारे ही आमरण अनशन शुरू करेंगी।
विधायक ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी है। वन विभाग और जिला प्रशासन स्तर की स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, लेकिन शासन से बजट जारी नहीं हो रहा।
उन्होंने कहा कि 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने क्षेत्र में एक पुल बनवाया था और लालढांग के लिए नए पुल की स्वीकृति भी दी थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद काम आगे नहीं बढ़ा। ।
प्रदर्शन के दौरान विधायक ने मांग की कि बनने वाले पुल का नाम हादसे में जान गंवाने वाले छात्र आर्यन भट्ट के नाम पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह पुल आवागमन के साथ उस दर्द की याद भी होगा जो क्षेत्र ने झेला है।
रवासन नदी के दोनों ओर मीठीबेरी, रसूलपुर बड़ा, रसूलपुर छोटा, लालढांग सहित दर्जनों गांव हैं। पहाड़ों में बारिश के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है या जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है। प्रशासन ने चेतावनी बोर्ड लगाए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी समाधान पुल ही है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला