दूरस्थ एससी-एसटी समुदाय के लोगों से धामी का संवाद, बोले- हर वर्ग को विकास से जोड़ना प्राथमिकता
देहरादून, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर उनके समाधान के निर्देश दिए। टिहरी, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी और देहरादून समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने सड़क, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।
मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में धामी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना और राज्य के सभी वर्गों एवं क्षेत्रों का समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी सहित राज्य के विभिन्न दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए लोगों ने सड़क, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, आजीविका और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक वर्ग और क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी वर्गों के समेकित और समावेशी विकास के मिशन के साथ काम कर रही है।
धामी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद जरूरी है। इसी उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम लोगों के बीच संवाद को मजबूत किया जा रहा है, ताकि स्थानीय समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता और सामाजिक न्याय का मार्ग दिखाया। सरकार उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित सभी वंचित और कमजोर वर्गों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक सशक्तीकरण के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों के विकास तथा कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहकर पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब पांच वर्षों में चकराता, कालसी, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी सहित राज्य के विभिन्न पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों का दौरा कर उन्होंने स्थानीय लोगों से सीधे संवाद किया है। इससे क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने और योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
धामी ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, छात्रवृत्ति, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य में भी एससी-एसटी समुदाय के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न योजनाएं लागू हैं।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, बिजली, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, लोककला, हस्तशिल्प और परंपराओं को मंच देने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और पारंपरिक शिल्पकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को बेहतर बाजार, प्रशिक्षण और विपणन से जोड़कर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार विकास के लिए नीतियां और संसाधन उपलब्ध करा सकती है, लेकिन स्थायी विकास के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए सरकार और जनता को मिलकर प्रयास करना होगा।
कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप सहित अन्य अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय