मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों से किया संवाद, साहित्यिक पर्यटन और संरक्षण पर दिया जोर

 

देहरादून, 27 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों एवं साहित्यकारों से संवाद किया। इस दौरान साहित्यकारों ने उन्हें अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं। मुख्यमंत्री ने सभी लेखकों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके साहित्यिक योगदान और वर्तमान लेखन पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक चेतना के संवर्धन में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार प्रदेश में सशक्त साहित्यिक वातावरण तैयार करने और साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास सहित अनेक ऋषि-मुनियों की तपोभूमि एवं कर्मभूमि रही है। इस भूमि ने भारतीय साहित्य को नई ऊंचाइयां देने वाले अनेक साहित्यकार दिए हैं। नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति विकसित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के पुराने, बिखरे और अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण एवं प्रकाशन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की योजना पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2022 में 'उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान' तथा वर्ष 2025 में 'दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान' की शुरुआत की गई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व के तहत रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन के '1000 पुस्तक दान अभियान' का समर्थन करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य विषय पर आधारित यह अभियान ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली सराहनीय पहल है, जिससे युवाओं में अध्ययन की संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो.गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, साहित्यकार प्रो. सुधा रानी पांडे, आलोक लाल, बुद्धिनाथ मिश्रा, प्रेम कुमार साहिल, शिव मोहन सिंह, राम मोहन सिंह, नेहा नेगी, कुलभूषण केन, अनमोल जैन, रूपा सोनी, अमर खरबंदा, शीशपाल गुसाईं, रमाकांत, दिवेश जोशी, प्रभा पंत, रूबी गुप्ता, रणधीर कुमार अरोड़ा सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय