गोरखा समाज की वीरता और राष्ट्रभक्ति पर पूरे देश को गर्व : धामी
-गोरखा समाज की भाषा, कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री
-नेपाली, गोरखाली सहित विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने तीन दिवसीय आयोजन में दीं रंगारंग प्रस्तुतियां
देहरादून, 01 नवंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गोरखा समाज का इतिहास साहस, त्याग और बलिदान की गाथाओं से भरा है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोरखा सैनिकों ने हमेशा अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। गोरखा समाज की वीरता, शौर्य और राष्ट्रभक्ति पर पूरे देश को गर्व है। यह समाज उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव है।
रविवार को देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में वीर गोरखा कल्याण समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेला-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखा समाज ने उत्तराखंड के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्य सरकार समाज की भाषा, कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा के डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। नेपाली भाषा और साहित्य को प्रोत्साहन देने के लिए नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के पारंपरिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। सीमांत क्षेत्रों में सड़क, पुल, व्यापार और परिवहन सुविधाओं का विस्तार केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि बनबसा में करीब 368 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत चेक पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने और राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर सितारगंज-टनकपुर मार्ग से भारत-नेपाल सीमा तक करीब 247 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन कनेक्टिविटी विकसित करने का कार्य भी किया जा रहा है। पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र में छारछुम पुल और प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना को भी उन्होंने क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य भी बना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशैं और दीपावली जैसे पर्व सामाजिक एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपराओं और जड़ों से जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने गोरखा समाज से प्रदेश के विकास में अपनी भागीदारी बनाए रखने का आह्वान किया।
वीर गोरखा कल्याण समिति के अध्यक्ष कमल थापा ने कहा कि गोरखा समाज ने हमेशा देश और उसकी मिट्टी के लिए बलिदान दिया है। समाज की वीरता, शौर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण उसकी पहचान है। उन्होंने महोत्सव के आयोजन में सहयोग देने वाले दानदाताओं, प्रायोजकों, कलाकारों, प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों और आमजन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य गोरखा समाज की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना है।
तीन दिवसीय महोत्सव के समापन अवसर पर गोरखाली और नेपाली लोकनृत्यों सहित विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। 'जय महाकाली, आ गयो गोरखाली' नृत्य को दर्शकों ने विशेष रूप से सराहा। इसके अलावा गणेश वंदना, नेपाली समूह नृत्य, गुजराती, पंजाबी, नेवारी, कुकुरी और मयूर नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। नेपाली कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं ने भी प्रस्तुतियां दीं।
समारोह में नेपाल दूतावास के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेंद्र थापा, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक प्रदीप बत्रा, दर्जा धारी धीरेन्द्र पंवार, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री ज्योति कोटिया, उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री अभिषेक शाही, ब्रिगेडियर राम सिंह थापा, दून इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन डीएस मान, देहरादून कैंट के सीईओ अनंत आकाश और असम गोरखा विकास परिषद के अध्यक्ष प्रेम तमांग सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र शाही, संकल्प पंत और श्याम राणा मगर ने संयुक्त रूप से किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय