अशोक सिंघल ने राम जन्मभूमि आंदोलन को जनांदोलन का स्वरूप दिया : धामी

 


-अशोक सिंघल का जीवन राष्ट्रसेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की प्रेरणा : मुख्यमंत्री

देहरादून, 11 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज को संगठित करने के लिए समर्पित किया। राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़कर जनांदोलन का स्वरूप देने में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। उनके अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत के संकल्प को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मुख्यमंत्री रविवार को पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज सभागार में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल विशेषांक का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन सादगी, सहजता, सेवाभाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है। उनका व्यक्तित्व बताता है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और समाज के लिए किए गए कार्यों से तय होता है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने तक अशोक सिंघल के प्रयास महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर संतों, धर्माचार्यों और समाज के अनेक वर्गों को साझा उद्देश्य से जोड़ने का काम किया।

उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल भगवान श्रीराम के आदर्शों को भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों का आधार मानते थे। मर्यादा, सेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाकर ही सशक्त, संस्कारित और समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। यदि अशोक सिंघल आज हमारे बीच होते तो मंदिर के भव्य स्वरूप को देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड मंदिर माला मिशन के साथ हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हरिपुर-कालसी में यमुना तट पर स्नान घाट का लोकार्पण किया गया है और मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इस क्षेत्र में मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू कर नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने धर्मांतरण विरोधी और दंगा रोधी कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा गौवंश के संरक्षण के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

युवाओं को संस्कारों और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ऐसे भारत की कल्पना करते थे, जहां युवा आधुनिक शिक्षा के साथ अपने संस्कारों, परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी सजग हों। राज्य सरकार युवाओं को नशे से दूर रखने और शिक्षा, खेल, रोजगार तथा सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और संस्कृति के अध्ययन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सनातन संस्कृति के मूल्यों को आत्मसात कर श्रेष्ठ राज्य के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष हरिद्वार में होने वाले कुंभ को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और वे सुरक्षित एवं सुखद आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल के विचारों और आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही उनके जन्म शताब्दी वर्ष को सार्थक बनाने का माध्यम है। उनके अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर योगदान देना चाहिए। राज्य सरकार भी उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

समारोह में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज, संत-महात्मा, विहिप के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय