देवीरथों की परिक्रमा और जयकारों के बीच संपन्न हुआ 27वां देवीधार महोत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने टेका माथा

 


चम्पावप, 29 जुलाई (हि.स.)। आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के संगम के रूप में आयोजित 27वें देवीधार महोत्सव का बुधवार को विधिवत समापन हो गया। आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर रायनगर चौड़ी, कलीगांव और डैंसली गांव से पहुंचे देवीरथों एवं देवी डोलों ने मां भगवती मंदिर की परिक्रमा कर महोत्सव को पूर्णता प्रदान की। इस दौरान देवीधार मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर मां भगवती के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।

बुधवार सुबह से ही देवीधार मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। दोपहर बाद सबसे पहले रायनगर चौड़ी से देवीरथ देवीधार पहुंचा। लंबी दूरी तय कर पहुंचे इस देवीरथ ने मंदिर की परिक्रमा की। देवीरथ में मां भगवती के स्वरूप में हरीश कापड़ी, गीता देवी तथा मां कालिका के स्वरूप में राधिका देवी विराजमान थीं। श्रद्धालुओं ने देवीरथ का भव्य स्वागत करते हुए जयकारों से पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।

इसके बाद दुर्गम पहाड़ी मार्गों को पार करते हुए कलीगांव का देवीरथ देवीधार पहुंचा। इस देवीरथ में मां भगवती के देवडांगर नारायण पुजारी तथा महाकाली के स्वरूप में हरु देवी विराजमान थीं। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ देवीरथ की परिक्रमा में भाग लिया।

महोत्सव के अंतिम चरण में डैंसली गांव से मां भगवती का डोला मंदिर पहुंचा। डोले में मां भगवती के देवडांगर करन देउपा तथा महाकाली के स्वरूप में रतन सिंह विराजमान रहे। महिलाओं और श्रद्धालुओं ने मां भगवती के जयकारों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया।

देवीधार विकास समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह मेहता ने सफल आयोजन के लिए क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देवीधार महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है, जिसे जनसहभागिता के बल पर लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

महोत्सव के समापन अवसर पर प्रहलाद सिंह मेहता, नरेश चंद्र राय, प्रकाश राय, शिवराज तड़ागी, हरगोविंद बोहरा, सुरेंद्र बोहरा, दीप जोशी, मुकेश साह, शिवराज सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी