पोस्टरों के जरिए नशामुक्ति का संदेश, संस्कृत और संस्कृति से जुड़ने की अपील
चम्पावत, 08 अक्टूबर (हि.स.)। लोहाघाट स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय जनपदीय संस्कृत छात्र-छात्रा प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूक किया गया। प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
आयोजन के दौरान परिसर में संस्कृत एवं नशामुक्ति विषयक स्लोगन वाले पोस्टर प्रदर्शित किए गए। आयोजक मंडल से जुड़े शिक्षकों ने विद्यार्थियों को दुर्व्यसनों से दूर रहकर स्वस्थ और अनुशासित जीवन अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम संयोजक वेद प्रकाश पंत ने कहा कि संस्कृत और संस्कृति भारतीय सभ्यता की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों और नैतिक परंपराओं से जुड़ाव युवाओं को सकारात्मक सोच प्रदान करता है तथा सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
नशा हटाओ-जीवन बचाओ अभियान से जुड़े प्रवक्ता सामश्रवा आर्य ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और अनुशासित आचरण की वाहक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के अध्ययन और व्यवहारिक उपयोग से व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सामाजिक चेतना को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा और संस्कारों को जीवन में अपनाने की अपील की।
प्रतियोगिता के दौरान संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेश भी दिए गए। आयोजकों ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर चलने से ही युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा प्रदान की जा सकती है।
कार्यक्रम में नवीन चंद्र जोशी, सतीश चंद्र जोशी, प्रकाश चंद्र उपाध्याय, डॉ. हरिशंकर गहतोड़ी, हरीश कलौनी, गोपालदत्त पंतोला, पंकज जोशी, जगदीश चंद्र जोशी, संतोष तिवारी और भगवान जोशी सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी