16 नवंबर से शुरू होगी जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया

 


-कार्यालयों में संस्कृत में लगेंगी नाम पट्टिकाएं, एकीकृत कृषि मॉडल को बढ़ावा देने के निर्देश

गोपेश्वर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड में 16 नवंबर से जनगणना के लिए स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद एक दिसंबर से चार जनवरी तक जनगणना का कार्य किया जाएगा। सचिव दीपक कुमार ने गुरुवार को पीपलकोटी में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को जनगणना के प्रति आमजन को जागरूक करने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

संस्कृति, शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षा, कृषि, महिला सशक्तीकरण और स्वास्थ्य सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

सचिव ने सभी कार्यालयाध्यक्षों को अपने कार्यालयों में प्रदेश की द्वितीय राजभाषा संस्कृत में नाम पट्टिकाएं लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की सांस्कृतिक और भाषायी विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।

कृषि क्षेत्र की समीक्षा के दौरान उन्होंने कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और पशुपालन को एक साथ जोड़कर एकीकृत कृषि मॉडल विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इन गतिविधियों को एकीकृत करने से किसानों की आय बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।

महिला सशक्तीकरण के संबंध में सचिव ने महिला स्वयं सहायता समूहों को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से जोड़ने और महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यालयों में बालिका शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और उचित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने जन औषधि केंद्रों को बढ़ावा देने तथा आमजन को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी पंकज उप्रेती, अधिशासी अभियंता तनुज काम्बोज, जिला कार्यक्रम अधिकारी हिमांशु बडोला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रकाश कपरुवाण