ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों पर हुआ मंथन
देहरादून, 29 मई (हि.स.)। दून विश्वविद्यालय में शुक्रवार काे ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन में भारत सहित ब्रिक्स देशों और साझेदार देशों के शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का शुभारंभ दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल के स्वागत संबोधन से हुआ। उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं ब्रिक्स शेरपा शंभू एस. हक्की ने मुख्य वक्तव्य देते हुए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को समय की आवश्यकता बताया।
सम्मेलन के दौरान “खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था में हरित औद्योगिक परिवर्तन”, “जैव विविधता एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का संरक्षण” तथा “हरित परिवर्तन के लिए जलवायु वित्त का विस्तार” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तीन तकनीकी सत्र रखे गए। सत्र में विभिन्न देशों से आए विशेषज्ञों ने हरित विकास, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, वित्तीय सहयोग और सतत विकास के मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
विशेष सत्र के दाैरान “क्रेडिट रेटिंग्स की पुनर्कल्पना: संप्रभुता, जोखिम और नई वित्तीय व्यवस्था” विषय पर चर्चा के साथ एक विशेष रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। वक्ताओं ने वैश्विक वित्तीय ढांचे में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान, तकनीक, वित्त और नीति स्तर पर सहयोग को बढ़ाकर वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। सम्मेलन का समापन सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों का मन मोह लिया। आयोजकों ने इसे विचारों के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला एक सफल एवं सार्थक आयोजन बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल