'भारत में शिक्षक शिक्षा की उभरती प्रवृत्तियां’ पुस्तक का विमोचन

 


हल्द्वानी, 26 फ़रवरी (हि.स.)। उच्च शिक्षा एवं शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के बी.एड. विभाग की ओर से संपादित पुस्तक 'भारत में शिक्षक शिक्षा की उभरती प्रवृत्तियां' का गुरुवार को महाविद्यालय परिसर में विमोचन किया गया। समारोह शैक्षिक गरिमा, बौद्धिक संवाद और अकादमिक उत्साह से परिपूर्ण रहा।

पुस्तक का संपादन प्रो. (डॉ.) टी.सी. पाण्डेय तथा डॉ. अरुण कुमार चतुर्वेदी ने किया है। यह कृति शिक्षक शिक्षा के बदलते परिदृश्य, समकालीन चुनौतियों और नवाचारों पर आधारित एक महत्वपूर्ण अकादमिक दस्तावेज के रूप में सामने आई है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. एन.एस. बनकोटी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक और तकनीकी परिवर्तनों के दौर में शिक्षक शिक्षा को शोधपरक, नवाचारोन्मुख एवं मूल्याधारित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने पुस्तक को समय की मांग के अनुरूप एक सार्थक प्रयास बताते हुए कहा कि यह शिक्षण-प्रशिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एल.बी.एस. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्दूचौड़ की प्राचार्य प्रो. सीमा श्रीवास्तव ने पुस्तक को शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में तैयार की गई यह कृति शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को नई दिशा प्रदान करेगी तथा शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता उन्नयन की प्रक्रिया को गति देगी।

पुस्तक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, समावेशी शिक्षा, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम, मुक्त शैक्षिक संसाधन, शिक्षक शिक्षा के वैश्विक मॉडल तथा पर्यावरण शिक्षा जैसे समसामयिक विषयों का विश्लेषणात्मक एवं शोधपरक विवेचन किया गया है। इससे स्पष्ट है कि यह कृति केवल सैद्धांतिक विमर्श तक सीमित न रहकर व्यावहारिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करती है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मंच संचालन डॉ. माया जोशी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनीता जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया। बी.एड. विभाग के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

इस अवसर पर उपस्थित शिक्षाविदों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में शोध, नवाचार और गुणवत्तापरक शिक्षण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता