एसआईआर को लेकर कांग्रेस पर भाजपा का पलटवार,भ्रम फैलाने का आरोप
देहरादून, 04 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि बिना प्रमाण संवैधानिक निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास है।
पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि एसआईआर के बाद राज्य की मतदाता सूची में करीब नौ लाख मतदाता कम हुए हैं और कांग्रेस को अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य एवं प्रमाण जनता के सामने रखने चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि किसी विशेष वर्ग के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अधिकतर कमी पर्वतीय क्षेत्रों में हुई है। उन्होंने कांग्रेस पर जाति और धर्म के नाम पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और चरणों के तहत पूरी की गई है तथा दावे-आपत्तियां दर्ज कराने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया भी अपनाई गई।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया है तो निर्वाचन आयोग ने इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध कराई है। वास्तविक शिकायतों का समाधान निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष किया जा सकता है। प्रेस वार्ताओं के जरिए भ्रम पैदा करने के बजाय विपक्ष को प्रमाण के साथ अपनी आपत्तियां संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखनी चाहिए।
ईसीआई नेट और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर जोशी ने कहा कि केवल किसी तकनीकी प्रणाली पर सवाल उठाने से वह गलत साबित नहीं हो जाती। यदि विपक्ष के पास किसी सॉफ्टवेयर या निर्वाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी के प्रमाण हैं तो उन्हें तथ्यों और दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक करना चाहिए।
उन्होंने ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन आरोपों के साथ तथ्य और जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा और निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया के पक्ष में है, लेकिन मतदाता अधिकारों की आड़ में चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल ‘लोकतंत्र बचाओ-वोट बचाओ’ के नाम पर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संस्थाओं पर अविश्वास के वातावरण से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान से मजबूत होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय