माटीकला बोर्ड में गैर-कुम्हारों की नियुक्ति पर प्रजापति समाज में रोष, सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
हरिद्वार, 08 जून (हि.स.)। प्रजापति (कुम्हार) समाज के प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड माटीकला बोर्ड में गैर-कुम्हार समाज के लोगों की नियुक्ति पर गहरा विरोध जताया। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा माटीकला बोर्ड में श्रीमती अनुराधा वालिया को उपाध्यक्ष तथा हरजीत सिंह और श्यामल कुमार को सदस्य नियुक्त किए जाने से कुम्हार समाज में व्यापक असंतोष है।
प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता में बबीता योगाचार्य ने कहा कि माटीकला बोर्ड का गठन विशेष रूप से कुम्हार समाज के पारंपरिक व्यवसाय, आर्थिक उत्थान, प्रशिक्षण, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में बोर्ड के महत्वपूर्ण पदों पर गैर-कुम्हार व्यक्तियों की नियुक्ति समाज के साथ अन्याय और विश्वासघात के समान है।
कहा कि मिट्टी के कार्य, उसकी गुणवत्ता, तकनीकी जानकारी और पारंपरिक शिल्पकला की बारीकियों को वही लोग बेहतर समझ सकते हैं, जिनका यह पुश्तैनी व्यवसाय रहा है। उन्होंने कहा कि कुम्हार समाज सदियों से माटीकला से जुड़ा हुआ है और इसका इतिहास हड़प्पा एवं सिंधु घाटी सभ्यता से भी पूर्व तक जाता है।
प्रजापति समाज के विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड, राज्यपाल तथा राष्ट्रपति के नाम ई-मेल और डाक के माध्यम से ज्ञापन भेजकर उपाध्यक्ष एवं दोनों सदस्यों की नियुक्ति निरस्त करने की मांग की है। हरिद्वार, देहरादून, रुड़की और काशीपुर सहित कई स्थानों पर आयोजित बैठकों में भी इस निर्णय का विरोध किया गया।
उन्होंने मांग की कि माटीकला बोर्ड में नियुक्त गैर-कुम्हार पदाधिकारियों को तत्काल हटाकर उनके स्थान पर कुम्हार समाज के योग्य सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया जाए। साथ ही उन्होंने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रजापति समाज को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई।
कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में प्रजापति समाज का कोई विधायक या सांसद नहीं है, इसलिए विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में समाज को उचित भागीदारी दी जानी चाहिए। बताया कि शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेगा तथा अपनी मांगों को उनके समक्ष रखेगा।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से अरुण प्रजापति, अंकुर प्रजापति, रविन्द्र कुमार प्रजापति, श्याम प्रजापति सहित अन्य मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला