मुखर्जी के बलिदान को राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता: सुरेश भट्ट

 


हल्द्वानी, 23 जून (हि.स.)। राज्य स्तरीय राष्ट्रीय ग्रामीण एवं स्वास्थ्य अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान को राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता और उनका जीवन और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

मंगलवार को कालाढूंगी विधानसभा के मुखानी मंडल अंतर्गत जज फार्म शक्ति केंद्र स्थित जन मिलन केंद्र में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सुरेश भट्ट ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रसेवा, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित किया। उनके विचार आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।

श्री भट्ट ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर डॉ. मुखर्जी का संघर्ष भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उनका मानना था कि भारत एक राष्ट्र है और उसके भीतर अलग संविधान, अलग ध्वज तथा अलग शासन व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का प्रसिद्ध उद्घोष, “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते थे और वहां देश के अन्य राज्यों की तरह समान संवैधानिक व्यवस्था लागू किए जाने के पक्षधर थे। राष्ट्र की एकता के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसे देश सदैव स्मरण रखेगा।

कार्यक्रम में शक्ति केंद्र प्रभारी विशंभर कांडपाल, बूथ अध्यक्ष हेम गंगोला, महेंद्र सिंह नगरकोटी, कुंदन सिंह रावत, शीला राणा, आर.डी. पांडे, एन.एस. किरौला, अशोक रावत, रमेश चंद्र तिवारी, गौरव नेगी, अशोक पपनै, हेम अवस्थी, भानु त्रिपाठी, सुभाष पांडे, कुलदीप पांडे, संतोष जोशी, गीता तिवारी और उदिता तिवारी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता