डॉ. एस. आर. रंगनाथन के 134वें जन्मोत्सव पर गुरुकुल में कार्यक्रम आयोजित

 


हरिद्वार, 13 अगस्त (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय सभागार में पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन के 134वें जन्मोत्सव के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुस्तकालय कर्मचारियों एवं छात्रों ने डॉ. रंगनाथन के योगदान को याद किया।

केंद्रीय पुस्तकालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मदनलाल जाट ने कहा कि पुस्तकों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है और उनमें अपार ज्ञान समाहित है। आधुनिक युग में भी पुस्तकों के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि डॉ. रंगनाथन ने पुस्तकालय के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए पाठकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

ऋषि हुड विश्वविद्यालय, सोनीपत (हरियाणा) के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रामानंद मालवीय ने ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पुस्तकालय कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे शिक्षकों और छात्रों के बीच सेतु का कार्य करते हुए उनकी आवश्यकता के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध कराकर शिक्षा के मार्ग को सुगम बनाते हैं। केंद्रीय पुस्तकालय के समीर राणा ने डॉ. रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित पुस्तकालय के पांच नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि यदि सभी कर्मचारी इन नियमों का अनुपालन करें तो वे अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकते हैं।

इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिव कुमार चौहान, डॉ. उधम सिंह, कुलभूषण शर्मा, हेमंत सिंह नेगी, बिजेंद्र सिंह, सत्यदेव, मनोज मिश्रा एवं विकास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में केंद्रीय पुस्तकालय के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला