भागवत कथा श्रवण से मिटते हैं पाप, जीवन को मिलता है मोक्ष का मार्ग : चिन्मय
हरिद्वार, 23 अप्रैल (हि.स.)। 21वें गुरु स्मृति महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर माँ गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा सायंकाल गंगा जी की भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कथा व्यास पूज्य चिन्मय बापू ने भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत कथा का श्रवण और उसका अनुसरण करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कथा मनुष्य को धर्म, भक्ति और सदाचार की राह पर चलने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने अजामिल प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि अजामिल प्रारंभ में धार्मिक और संस्कारी व्यक्ति था, लेकिन बुरी संगति के कारण वह पथभ्रष्ट हो गया और अनेक पाप कर बैठा। किंतु मृत्यु के समय अपने पुत्र नारायण का नाम लेने से उसे भगवान का स्मरण हो गया, जिससे उसका उद्धार संभव हुआ। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि संसारिक मोह-माया में रहते हुए भी ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाना आवश्यक है।
इस अवसर पर उछाली आश्रम के परमाध्यक्ष श्री महंत बिष्णु दास महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चे मन से भगवान का स्मरण करने मात्र से भी मनुष्य को मोक्ष का मार्ग प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य कितना भी भटक जाए, यदि वह ईश्वर की शरण में लौट आता है तो उसका जीवन सुधर सकता है।
कथा में उपस्थित संत-महात्माओं में श्रीमहंत सरयू दास जी महाराज (भावनगर, गुजरात), महंत विमल दास महाराज, महंत प्रेमदास महाराज सहित अनेक गणमान्य श्रद्धालु शामिल रहे। इसके अलावा श्रीमती चाँद, बृजमोहन सेठ, श्रीमती श्वेता, नितिन सेठ, वंदना, भव्य, अनिरुद्ध, पुनीत दास, अधिकारी राघवेन्द्र दास व आश्रम के सेवकगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला