अमेरिकन आश्रम पर फिर गरमाया विवाद, पीएमओ के जवाब से मचा हड़कंप

 


हरिद्वार, 28 सितंबर (हि.स.)। भूपतवाला स्थित अमेरिकन आश्रम की करीब तीन बीघा जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। जमीन की कथित बिक्री और परिसर में अवैध दुकानों के निर्माण के आरोपों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से मिले जवाब के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। जन संघर्ष मोर्चा ने तहसील प्रशासन की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए आश्रम की भूमि को कब्जामुक्त कराने, सरकारी अधिग्रहण करने और यहां भूपतवाला डिग्री कॉलेज स्थापित करने की मांग दोहराई है।

अमेरिकन आश्रम की जमीन की कथित बिक्री और अवैध दुकानों के निर्माण के मुद्दे पर क्षेत्र के दो पार्षदों ने भी प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। मामला मीडिया में आने के बाद जन संघर्ष मोर्चा ने भी इसे लेकर हस्तक्षेप किया।

मोर्चा ने आश्रम की जमीन पर कथित अवैध कब्जे रोकने, भूमि का अधिग्रहण करने और आश्रम परिसर में भूपतवाला डिग्री कॉलेज स्थापित करने की मांग को लेकर पीएमओ को पत्र भेजा था। अब पीएमओ की ओर से मिले जवाब में तहसीलदार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मौजूदा परिस्थितियों में भूमि अधिग्रहण संभव नहीं होने की बात कही गई है।

जन संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन खत्री का कहना है कि रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या और उनके नामों का उल्लेख नहीं किया गया। साथ ही संबंधित खसरे की भूमि की बिक्री से जुड़े तथ्यों को भी स्पष्ट नहीं किया गया है। खत्री ने आरोप लगाया कि आश्रम परिसर में बनी कथित अवैध दुकानों की जिम्मेदारी रुड़की-हरिद्वार विकास प्राधिकरण पर डाल दी गई है। उनका कहना है कि भूमि और निर्माण से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

गुलशन खत्री ने कहा कि मोर्चा अपने लीगल एडवाइजर से विचार-विमर्श के बाद स्थानीय लोगों से जमीन से जुड़े दस्तावेज, पुराने अभिलेख और अन्य साक्ष्य जुटाएगा। इसके बाद नए तथ्यों के साथ दोबारा पीएमओ को पत्र भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकन आश्रम की जमीन को खुर्द-बुर्द होने से रोकने के लिए मोर्चा हर स्तर पर प्रयास करेगा।

अमेरिकन आश्रम की भूमि का मामला अब पीएमओ को भेजे गए पत्र, तहसील प्रशासन की रिपोर्ट, कथित अवैध कब्जे के आरोपों और सरकारी अधिग्रहण की मांग के बीच फिर चर्चा में है। मोर्चा के अगले कदम पर क्षेत्रवासियों की नजर है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला