कांवड़ियों के लिए सुरक्षा कवच बने सेना के जवान, अब तक 44 का रेस्क्यू
हरिद्वार, 09 अगस्त (हि.स.)।“हर-हर महादेव” के जयकारों के बीच हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा की तेज धार और बढ़ती भीड़ के बीच भारतीय सेना के बंगाल इंजीनियर ग्रुप एवं सेंटर, रुड़की के जवान श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा कवच बनकर उभरे हैं।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने बताया कि 31 जुलाई से अब तक बीईजी एवं सेंटर रुड़की के प्रशिक्षित जवानों और गोताखोरों द्वारा गंगा की तेज धार में फंसे 44 श्रद्धालुओं का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है। किसी श्रद्धालु के असंतुलित होने या बहाव की चपेट में आने की सूचना मिलते ही जवान तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर देते हैं।
लाइफ जैकेट, रेस्क्यू रोप और लाइफ रिंग जैसे उपकरणों के साथ वे संकट में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं। हरिद्वार से रुड़की तक गंगा किनारे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में सेना की अहम भूमिका है। रुड़की के सोलानी पार्क से लेकर हरिद्वार के हाथी पुल क्षेत्र तक जवान मुस्तैदी से तैनात हैं। उनके लिए यह केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने का संकल्प है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन और सेना के बीच बेहतर समन्वय से कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जा रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत बचाव व्यवस्थाओं के समन्वय में लगी हैं।
सीमा पर देश की रक्षा करने वाले ये सैनिक जब गंगा की लहरों में किसी अनजान की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, तो यह कर्तव्य के साथ मानवता की मिसाल बन जाता है। 31 जुलाई से 08 अगस्त तक 44 श्रद्धालुओं का रेस्क्यू जवानों की तत्परता और साहस का प्रमाण है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला