पूर्व सैनिक राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव: राज्यपाल
-देहरादून में 10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस गरिमा के साथ मनाया गया
देहरादून, 14 जनवरी (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने पूर्व सैनिकों की राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समर्पण को समाज के लिए अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का मंत्र पूर्व सैनिकों ने केवल अपनाया नहीं, बल्कि जीवनभर जिया है। उनका यह समर्पण आज भी समाज को दिशा देने और राष्ट्र निर्माण को सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है।
बुधवार को मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया की ओर से 10वां सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस गरिमा के साथ मनाया गया। यह दिवस भारत के प्रथम कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम करिअप्पा की सेवानिवृत्ति की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उत्तराखंड के विशिष्ट पूर्व सैनिकों को सम्मानित भी किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि बलिदानियों के परिवारों और उनके आश्रितों की देखभाल करना हमारा सर्वोच्च कर्तव्य है। प्रत्येक पूर्व सैनिक में नेतृत्व, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय गुण होता है, जो उन्हें समाज का आदर्श मार्गदर्शक बनाता है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक न केवल सेना में, बल्कि नागरिक जीवन में भी लोककल्याण की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही वे हनी क्रांति, अरोमा क्रांति, मिलेट क्रांति, होमस्टे योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों जैसे अभियानों को सशक्त बना सकते हैं।
इस कार्यक्रम में राज्य के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल एमपीएस गिल, वीएसएम ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और निर्माण में पूर्व सैनिकों के योगदान को सदैव स्मरण किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के माध्यम से पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के प्रति मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। आयोजन में लगभग एक हजार पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर सेना, नौसेना और वायु सेना के सेवारत जवानों के साथ एनसीसी कैडेट्स भी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय