एरीज आधुनिक भारत के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के सशक्त प्रतीक: राज्यपाल
नैनीताल, 17 जून (हि.स.)। उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने बुधवार को नैनीताल जनपद के देवस्थल स्थित आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एरीज) का भ्रमण किया ।
कहा कि एरीज आधुनिक भारत की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है तथा अंतरिक्ष विज्ञान और खगोलीय अनुसंधान के क्षेत्र में देश को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विज्ञान को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर बल दिया।
राज्यपाल ने कहा कि देवस्थल स्थित वेधशाला वैज्ञानिक साधना और ज्ञान सृजन का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने यहां स्थित एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप को भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और आत्मविश्वास का प्रतीक बताते हुए तारों के निर्माण, सुपरनोवा, ब्लैक होल व अन्य खगोलीय विषयों पर एरीज के अनुसंधानों की सराहना की।
उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और कर्मियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा विश्लेषण और डिजिटल तकनीक भविष्य के विज्ञान की आधारशिला हैं। उन्होंने देवस्थल वेधशाला को उत्तराखंड में खगोलीय पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने वाला बताया व दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों वेधशाला भ्रमण का अवसर उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने उत्कृष्ट शोध कार्य करने वाले पांच शोधार्थियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में एरीज के निदेशक डॉ. मनीष नाजा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी